पटना: साल 2010 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2010) ने राज्य की राजनीति में एनडीए के वर्चस्व को स्पष्ट कर दिया। छह चरणों में हुए इन चुनावों में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शानदार प्रदर्शन किया।
एनडीए बनाम राजद-लोजपा गठबंधन
इन चुनावों में एनडीए गठबंधन में जदयू और भाजपा ने मिलकर चुनाव लड़ा, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने गठबंधन बनाया। कांग्रेस ने अकेले दम पर चुनाव लड़ा।
चुनाव परिणाम: एनडीए का प्रचंड बहुमत
चुनाव नतीजों में एनडीए ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। जदयू ने 141 सीटों पर चुनाव लड़ा और 115 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। भाजपा ने 102 सीटों पर प्रत्याशी उतारे और 91 सीटों पर जीत दर्ज की।
बिहार विधानसभा चुनाव 2005: बिहार में दो चुनाव, नई राजनीतिक दिशा की शुरुआत
वहीं, राजद ने 168 सीटों पर चुनाव लड़कर केवल 22 सीटें जीतीं, जो फरवरी 2005 के चुनावों में मिली 75 सीटों के मुकाबले बेहद खराब प्रदर्शन था। लोजपा ने 75 सीटों पर चुनाव लड़कर सिर्फ 3 सीटें हासिल कीं। कांग्रेस ने सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसे महज 4 सीटों पर संतोष करना पड़ा।
राजद का पतन
2010 के चुनावों ने राजद के प्रभाव को लगभग खत्म कर दिया। लालू यादव की पार्टी, जो कभी बिहार की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत मानी जाती थी, 22 सीटों पर सिमट गई। यह प्रदर्शन 2005 के 75 सीटों के मुकाबले भारी गिरावट को दर्शाता है।
नीतीश कुमार का नेतृत्व और एनडीए का एजेंडा
चुनाव में नीतीश कुमार ने अपने नेतृत्व कौशल और “सुशासन” के एजेंडे को सामने रखा। सड़क निर्माण, बिजली आपूर्ति, और महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर उनके काम ने जनता का भरोसा जीता। भाजपा के साथ उनकी गठबंधन रणनीति ने चुनावी मैदान में एनडीए को मजबूती दी।
कांग्रेस का प्रदर्शन और महागठबंधन की राह
इन चुनावों में कांग्रेस ने सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी को केवल 4 सीटों पर जीत मिली। यह हार कांग्रेस के लिए एक बड़ी राजनीतिक झटका साबित हुई। इसके बाद कांग्रेस ने 2015 और 2020 के चुनावों में महागठबंधन का हिस्सा बनकर चुनाव लड़ने का फैसला किया।
नीतीश कुमार बने मुख्यमंत्री
एनडीए की प्रचंड जीत के बाद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान सौंपी गई। उनके नेतृत्व में 2010 का चुनाव बिहार के इतिहास में एनडीए के सबसे मजबूत दौर की शुरुआत का प्रतीक बन गया।
2010 का चुनाव: एक निर्णायक मोड़
2010 के विधानसभा चुनाव ने बिहार की राजनीति को एक नई दिशा दी। एनडीए के विकास और सुशासन के एजेंडे ने जातीय समीकरणों और पारंपरिक राजनीति को पीछे छोड़ दिया। यह चुनाव राज्य में नीतीश कुमार की मजबूत पकड़ और राजद के गिरते प्रभाव का प्रतीक बन गया।




















