बिहार कांग्रेस में नई रणनीति की गूंज सुनाई देने लगी है। नवनिर्वाचित 40 जिलाध्यक्ष आज दिल्ली रवाना होंगे, जहां 4 अप्रैल को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ उनकी महत्वपूर्ण बैठक होगी। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें संगठन विस्तार, पार्टी की मजबूती और बूथ लेवल तक कांग्रेस के प्रभाव को बढ़ाने पर चर्चा होगी।
दिल्ली से पहले पटना में होगी बड़ी बैठक
दिल्ली रवाना होने से पहले प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू की अध्यक्षता में जिलाध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण बैठक होगी। इसमें प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व सोशल मीडिया के जरिए राहुल गांधी को एक प्रेजेंटेशन देगा, जिसमें बताया जाएगा कि जिलाध्यक्ष किस तरह पार्टी को मजबूत करेंगे और जमीनी स्तर पर कांग्रेस को पुनर्जीवित करने की योजना पर काम करेंगे। बैठक के बाद सभी जिलाध्यक्ष देर शाम दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे।
जिला और बूथ लेवल कमेटियों को मजबूत करने की जिम्मेदारी
माना जा रहा है कि राहुल गांधी की बैठक में हर जिलाध्यक्ष को एक महत्वपूर्ण टास्क सौंपा जाएगा— अपने क्षेत्र में बूथ लेवल तक मजबूत कमेटी तैयार करना। पार्टी चाहती है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मजबूत संगठन के साथ मैदान में उतरे, ताकि विपक्षी दलों को कड़ी चुनौती दी जा सके।
40 जिलाध्यक्षों की सूची – जातीय संतुलन साधने की कोशिश?
बिहार कांग्रेस ने मंगलवार रात 40 जिलाध्यक्षों की सूची जारी की थी, जिसमें 21 नए चेहरे शामिल किए गए हैं, जबकि 19 पुराने जिलाध्यक्षों को फिर से मौका दिया गया है।
जातीय समीकरण पर नजर डालें तो—
- 14 सवर्ण जाति से
- 5 दलित समुदाय से
- 6 मुस्लिम नेता
- 1 महिला जिलाध्यक्ष
कांग्रेस की नई रणनीति – क्या बदलेगा बिहार की सियासी तस्वीर?
बिहार कांग्रेस लंबे समय से कमजोर स्थिति में रही है, लेकिन यह नया संगठनात्मक बदलाव क्या पार्टी के लिए ‘संजीवनी’ साबित होगा? यह बड़ा सवाल है। राहुल गांधी की बैठक के बाद यह साफ हो सकता है कि कांग्रेस बिहार की सियासी जंग में कितनी मजबूती से उतरने वाली है।
अब सभी की निगाहें 4 अप्रैल की बैठक पर टिकी हैं, जहां बिहार कांग्रेस की आगे की सियासी दिशा तय होगी।