भारतीय जनता पार्टी के लिए अभी का वक्त जश्न और खुशी का हो सकता था। 2014 में 10 साल बाद भाजपा केंद्र की सत्ता पर पहले काबिज हुई थी। इसी से उदय हुआ था नरेंद्र मोदी का। जो अब भारत के प्रधानमंत्री होने के साथ चुनावी जीत के सूत्रधार बन चुके हैं। इन 8 वर्षों में अधिकतर चुनाव मोदी के नाम पर लड़े और जीते गए हैं। 2019 में तो पहली बार भाजपा अपने बूते पूर्ण बहुमत मोदी मैजिक के दम पर ही पा सकी। ऐसे में सरकार के 8 साल पूरे होने पर जश्न स्वाभाविक था। लेकिन हुआ इसका उल्टा। भाजपा अभी डिफेंस मोड में आ गई है। क्योंकि उसके कुछ नेताओं के बयान न सिर्फ देश में विरोध का स्वर मजबूत कर गए बल्कि विदेशी दबाव भी बना है।
नुपुर प्रकरण में हुई किरकिरी

भारतीय न्यूज चैनलों पर हिंदू-मुस्लिम डिबेट की आड़ में मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगता रहा है। इन्हीं बहसों में प्रमुख चेहरा बन चुकी भाजपा की प्रवक्ता नुपुर शर्मा ने पैगम्बर मोहम्मद पर ही टिप्पणी कर दी। नतीजा यह हुआ कि भारत में तो विपक्ष हमलावर हुआ ही, विदेशों में भी भारत की किरकिरी होने लगी। कतर, ओमान, सऊदी अरब, बहरीन समेत कई मुस्लिम देशों ने सार्वजनिक तौर पर ऐतराज जताया। अपनी विदेश नीति को सर्वोच्च बताने वाली भाजपा के लिए यह मुश्किल की घड़ी साबित हुई। नतीजा, भाजपा को कार्रवाई करनी पड़ी। Nupur Sharma द्वारा माफी मांगने के बाद भी उन्हें निलंबित किया गया। एक अन्य नेता तो बर्खास्त कर दिए गए। वो भी सिर्फ नुपुर के समर्थन में ट्वीट करने पर।
‘विकास के मुद्दे पर अब रहना चाहती है BJP’
वैसे तो भाजपा नेताओं के बयानों और भाषणों में हिंदू-हिंदुत्व कई बार सरेआम होता है। लेकिन अब भाजपा विकास के मुद्दे को ही अगली पंक्ति में रखना चाहती है। पिछले माह जयपुर में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई। बैठक में आने वाले चुनावों पर भी चर्चा हुई। बताया जाता है कि बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने नेताओं को संयम बरतने की सलाह भी दी। लेकिन तभी नुपुर शर्मा का विवाद सामने आया। इसी कारण पार्टी ने पीएम मोदी के स्टैंड के खिलाफ गए इस बेवजह की टिप्पणी पर कड़ा एक्शन लिया।
’38 नेताओं के बयान कटघरे में’

भाजपा हर हाल में आने वाले चुनावों में विकास को मुख्य एजेंडा रखना चाहती। ऐसे में उसने अपने नेताओं के गैरजरुरी बयानों पर ऐतराज जताया है। पार्टी ने सितंबर 2014 से मई 2022 तक के बयानों को आईटी विशेषज्ञों के जरिए ऑडिट किया है। इसमें 38 नेताओं के बयानों पर पार्टी को ऐतराज है। इसमें गिरिराज सिंह, शोभा करंदलाजे, विनय कटियार, महेश शर्मा, साक्षी महाराज, संगीत सोम जैसे नाम शामिल हैं। 38 में से 27 चुने हुए नेताओं को पार्टी की ओर से वार्निंग दी गई है।




















