समाज सुधार अभियान (social reform campaign) एक बार फिर से शुरू हो गया है। यह अभियान 22 फ़रवरी से भागलपुर (Bhagalpur) से शुरु हुआ। इस अभियान के तहत सीएम नीतीश आज जमुई में थें। कार्यक्रम के दौरान जमुई के अलावा शेखपुरा, लखीसराय और मुंगेर के जनप्रतिनिधियों के साथ वरीय पदाधिकारी मौजूद हैं थें। सीएम नीतीश श्री कृष्ण सिंह स्टेडियम में 4 जिलों के जीविका दीदियों से संवाद कर रहे थें।
राष्ट्रपति पद की अटकलें
सीएम नीतीश कुमार ने जमुई समाज सुधार यात्रा के दौरान राष्ट्रपति पद की चर्चाओं पर विराम लगा दिया। पिछले कुछ दिनों से अटकलें लगाईं जा रही थीं की सीएम नीतीश राष्ट्रपति के उम्मीदवार हो सकते है। पिछला घटना क्रम को देखा जाए तो नीतीश कुमार पिछले दिनों दिल्ली में रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ पीके से मुलाक़ात भी हुई थी। तब हीं से यह अटकलें तेज हो गई थी कि नीतीश कुमार राष्ट्रपति के उम्मीदवार हो सकते हैं। यहां तक कहा जा रहा था कि प्रशांत किशोर विपक्षी पार्टियों से समर्थन माँगने में भी जुट गए हैं।
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राष्ट्रपति पद की चर्चाओं पर विराम
आज समाज सुधार यात्रा के दौरान राष्ट्रपति पद के सवाल पर पत्रकारों के बीच नीतीश कुमार ने उन सारी चर्चाओं पर यह कह कर विराम लगा दिया कि राष्ट्रपति पद के लिए किसी से बात नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के पद में कोई रूची और दिलचस्पी नहीं है। ऐसी चर्चा पर घोर आश्चर्य जताते हुए नीतीश ने कहा कि राष्ट्रपति बनने की इक्षा नहीं है और इन चर्चाओं से कोई लेना देना नहीं है।
राष्ट्रपति पद की चर्चा कहां से शुरू
शिवानन्द तिवारी ने आज संवाददाता से बात करते हुए कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए नीतीश कुमार के नाम की चर्चा पता नहीं कहाँ से शुरू हुई। जहाँ तक विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में उनको पेश करने की बात होती है तो वह मुझे असंभव दिखाई देता है। शिवानंद ने कहा कि पहले का याद करें कि नरेन्द्र मोदी के प्रति नीतीश कुमार की क्या धारणा थी और क्या संकल्प लेकर ये उनसे अलग हुए थे? आज उन्हीं नरेंद्र मोदी द्वारा सच्चे समाजवादी होने के प्रमाण पत्र को जो व्यक्ति अपने ऊपर उनकी कृपा मानता हो वह भाजपा से अलग हो सकता है?
कल्पना भी कैसे
शिवानंद तिवारी ने कहा कि कोई इसकी कल्पना भी कैसे कर सकता है! इसके अलावा यह भी देखने की बात है कि राष्ट्रपति सेना के तीनों अंगों का सर्वोच्च कमाण्डर होता है। शिवानंद तिवारी ने आगे कहा कि यह भी विचारणीय है कि सेना का सर्वोच्च कमांडर क्या ऐसा होना चाहिए जो अपने सार्वजनिक जीवन में हर चुनौती के सामने घुटने टेकता आया है। जो अपने संकल्पों पर टिकता नहीं हो। ऐसा व्यक्ति संकट के समय हमारी सेना को अनुप्राणित कैसे कर सकता है।