डिजिटल युग में जब पूरा देश तकनीक की ओर बढ़ रहा है, बिहार के सरकारी स्कूल अब भी बिना कंप्यूटर और आईसीटी लैब के पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की ताजा रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 78,386 स्कूलों में से 73,190 स्कूलों में कंप्यूटर तक नहीं हैं। रिपोर्ट सामने आते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। विभाग ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए फिर से जांच कराने का आदेश दिया है।
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आंकड़े जो सोचने पर मजबूर कर देंगे
- बिहार के सिर्फ 7% स्कूलों में ही कंप्यूटर और आईसीटी लैब उपलब्ध हैं।
- पूर्वी चंपारण सबसे पिछड़ा जिला साबित हुआ—3650 स्कूलों में से 3561 में कंप्यूटर नहीं।
- मुजफ्फरपुर में 3423 स्कूलों में से 3177 स्कूलों में कंप्यूटर नहीं।
- 19 जिले ऐसे हैं, जहां 93 से 97% स्कूलों में कंप्यूटर का नामोनिशान नहीं।
- सबसे बेहतर स्थिति शेखपुरा और वैशाली की, जहां 11 से 13% स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध।
पिछले कुछ वर्षों में बिहार सरकार ने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी लैब बनाने की कई योजनाएँ शुरू कीं। लेकिन रिपोर्ट बताती है कि इन योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर बहुत कम देखने को मिला है।
मुजफ्फरपुर जिले में जरूर 700 से अधिक मिडिल स्कूलों में आईसीटी लैब बनाई गई है, और 400 हाईस्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधा दी गई है। लेकिन शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि कई स्कूलों में कंप्यूटर खराब पड़े हैं और उनकी मरम्मत तक नहीं कराई जा रही।
बिहार के लाखों छात्र अब भी बिना डिजिटल संसाधनों के पढ़ाई कर रहे हैं। जब देशभर में ऑनलाइन और तकनीकी शिक्षा की मांग तेजी से बढ़ रही है, तब बिहार के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर की इतनी दयनीय स्थिति राज्य के भविष्य के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।