बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज़ हो गई है। लंबे समय से अटके कैबिनेट विस्तार पर अब अंतिम मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है। 28 फरवरी को बजट सत्र से पहले बिहार सरकार में नए मंत्रियों की एंट्री हो सकती है। BJP की कोर कमेटी बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई, जिसके बाद सियासी गलियारों में नए समीकरणों की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
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कैबिनेट विस्तार: किसकी किस्मत चमकेगी?
BJP कोटे से 4 से 5 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इनमें सबसे प्रमुख नाम पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा और अनिल शर्मा का है। दोनों ही नेता सवर्ण समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और इन दोनों में से किसी एक को मंत्री पद मिल सकता है। इसके अलावा, नवल किशोर यादव को पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व देने के लिए मंत्री बनाए जाने की चर्चा जोरों पर है।
महिला सशक्तिकरण की ओर एक कदम
बिहार के नए कैबिनेट में महिला मंत्री को भी जगह देने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है। इस दौड़ में सबसे आगे नाम कविता देवी का है, जो महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के तौर पर कैबिनेट में एंट्री ले सकती हैं।
‘एक व्यक्ति, एक पद’ फॉर्मूला लागू?
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के बयान ने राजनीतिक पारा और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा, “मैं आज ही मंत्री पद से इस्तीफा देने जा रहा हूं। बीजेपी में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का सिद्धांत लागू है। कैबिनेट विस्तार को लेकर मेरे पास कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।”
बड़े मंत्रियों के विभाग कटने के आसार
कैबिनेट विस्तार के साथ ही मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल की संभावना है। जिन नेताओं के पास दो या उससे अधिक मंत्रालय हैं, उनसे एक विभाग लिया जा सकता है और नए मंत्रियों को सौंपा जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के बड़े चेहरों को भी विभागीय कटौती झेलनी पड़ सकती है, ताकि सत्ता संतुलन बना रहे।
बताया जा रहा है कि बिहार में बीजेपी इस विस्तार के जरिए जातीय संतुलन और संगठनात्मक मजबूती पर फोकस कर रही है। सवर्ण, पिछड़ा और महिला वर्ग को प्रतिनिधित्व देकर संतुलन साधा जाएगा। गठबंधन की मजबूती के लिए कुशल और वफादार नेताओं को जगह दी जा सकती है। बजट सत्र से पहले मंत्रियों की नई टीम बनाकर सरकार की ताकत बढ़ाने की कोशिश होगी।