बिहार में बुधवार को मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ। बीजेपी कोटे से 7 नये मंत्रियों ने कैबिनेट मंत्री की शपथ ली। बीजेपी कोटे से बुधवार को संजय सरावगी, डॉ सुनील कुमार, जीवेश मिश्रा, राजू कुमार सिंह, मोतीलाल प्रसाद, विजय कुमार मंडल औऱ कृष्ण कुमार मंटू ने मंत्री पद की शपथ ली। बिहार सरकार में पहले से ही मुख्यमंत्री को लेकर 30 मंत्री थे। एक मंत्री दिलीप जायसवाल ने इस्तीफा दिया और 7 नये मंत्रियों ने शपथ ली। लिहाजा बिहार में मंत्रियों की कुल संख्या 36 हो गयी।
इसके साथ ही करीब 20 साल पहले बिहार की सत्ता संभालने वाले नीतीश कुमार ने दो नये रिकार्ड बना लिये। नीतीश कैबिनेट में पहली बार जदयू से ज्यादा भाजपा के मंत्रियों की संख्या हो गयी। साथ ही 20 वर्षों में पहली बार नीतीश कैबिनेट हाउसफुल हुआ है। उदाहरण के लिए हम नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी पिछली सरकार को ही देखें तो 2022 में बनी जेडीयू, आरजेडी औऱ कांग्रेस की सरकार में कुल 31 मंत्री थे। उससे पहले 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद जब बीजेपी और जेडीयू की सरकार बनी थी तब भी मंत्रिमंडल में सिर्फ 30 मंत्री ही थे।
मतदाताओं के साथ गद्दारी.. राजू सिंह के मंत्री बनने पर VIP ने साधा निशाना
संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक बिहार में इससे ज्यादा मंत्री नहीं हो सकते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1ए) के अनुसार, किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की संख्या, विधानसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। बिहार में विधानसा में कुल 243 सदस्य है। इसका 15 प्रतिशत 36.45 होता है। इसका अर्थ ये है कि बिहार में मुख्यमंत्री समेत कुल 36 मंत्री ही बन सकते हैं।
पहली बार जेडीयू के सहयोगी से कम मंत्री
इस मंत्रिमंडल विस्तार के बाद एक और नया रिकार्ड बना है। वैसे तो जेडीयू ने अपने हिस्से के विभाग नहीं छोड़े हैं। लेकिन उसके मंत्रियों की तादाद बीजेपी के मुकाबले काफी कम हो गये हैं। मौजूदा मंत्रिमंडल में नीतीश कुमार समेत जेडीयू के सिर्फ 13 मंत्री हैं। वहीं, बीजेपी के मंत्रियों की संख्या 21 हो गयी है। इसके अलावा एक निर्दलीय विधायक सुमित कुमार सिंह और हम के संतोष कुमार सुमन भी मंत्री हैं। लेकिन ऐसा पहली दफे हुआ है कि नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में किसी दूसरी पार्टी के मंत्री की तादाद जेडीयू के मंत्रियों की संख्या की तुलना में डेढ़ गुणा से भी ज्यादा हो गया है।