बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है। मंगलवार देर रात अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने राज्य के सभी 40 सांगठनिक जिलों में नए जिलाध्यक्षों और कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति की। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी इस सूची में 58 नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजेश कुमार के नेतृत्व में नई टीम तैयार
18 मार्च को राजेश कुमार को बिहार कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के ठीक 14 दिन बाद, पार्टी ने यह बड़ा कदम उठाया है। कई जिलों में एक से अधिक कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। पार्टी ने गया और कटिहार जैसे प्रमुख जिलों में दो-दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाए हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि कांग्रेस अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति बना रही है।
पटना को मिली नई कमान
राजधानी पटना शहर के जिलाध्यक्ष के रूप में शशिरंजन की नियुक्ति हुई है, जबकि रंजीत कुमार को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, पटना ग्रामीण-1 में सुमित कुमार सन्नी को जिलाध्यक्ष और उदय कुमार चंद्रवंशी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। पटना ग्रामीण-2 में गुरुजीत सिंह को जिलाध्यक्ष और नीतू निशाद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है।
प्रमुख जिलों में नियुक्ति की पूरी सूची
प्रमुख जिलाध्यक्षों की नियुक्ति:
- अररिया – शाद अहमद
- पूर्वी चंपारण – शशि भूषण राय
- गोपालगंज – ओम प्रकाश गर्ग
- मधेपुरा – सूर्य नारायण राम
- मुजफ्फरपुर – अरविंद मुकुल
- सुपौल – सूर्यनारायण मेहता
- पश्चिम चंपारण – प्रमोद सिंह पटेल
- औरंगाबाद – राकेश कुमार सिंह
- बेगूसराय – अभय कुमार सर्जेंट
- बक्सर – डॉ. मनोज कुमार पांडेय
- गया – संतोष कुमार कुशवाहा
- कैमूर – राधे श्याम कुशवाहा
- खगड़िया – अविनाश कुमार अविनाश
- लखीसराय – अमरेश कुमार अनीश
- शेखपुरा – प्रभात कुमार चंद्रवंशी
प्रमुख कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति:
- गोपालगंज – शाहिबुल अख्तर
- मुजफ्फरपुर – तारिणी ऋषिदेव
- सुपौल – राम नारायण प्रसाद, अक्षय शुक्ला
- गया – शहाबुद्दीन रहमानी, उदय मांझी, राम प्रवेश ठाकुर, पुरुषोत्तम तांती
- खगड़िया – राजकिरण ठाकुर
- लखीसराय – अरविंद कुमार, मो. इनामुल हक
- पटना ग्रामीण-1 – उदय कुमार चंद्रवंशी
- पटना ग्रामीण-2 – नीतू निशाद
- शेखपुरा – रौशन कुमार
बिहार कांग्रेस ने यह नियुक्तियां ऐसे समय में की हैं जब राज्य में विधानसभा चुनाव की हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने संगठन को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने और सभी जिलों में प्रभाव बढ़ाने के उद्देश्य से यह बदलाव किए हैं। कांग्रेस की यह रणनीति 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के विधानसभा चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा मानी जा रही है।