छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा की घने जंगलों में, जहां कभी माओवादियों की गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, आज विज्ञान की रोशनी ने उम्मीद की नई किरण जगाई है। दशकों से उथल-पुथल और हिंसा के प्रतीक रहे इस जिले में अब शिक्षा और नवाचार की क्रांति जन्म ले रही है। इस परिवर्तन के केंद्र में खड़ा है दंतेवाड़ा साइंस सेंटर, जो युवाओं के लिए ज्ञान और अवसरों के नए द्वार खोल रहा है।
कभी भय और असुरक्षा से घिरा यह इलाका अब विज्ञान और प्रौद्योगिकी को अपनाकर उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर हो रहा है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे “एक उज्ज्वल भविष्य, प्रगति और असीम संभावनाओं का प्रतीक” करार दिया है।
एक नई सोच की ओर कदम
इस विज्ञान केंद्र का उद्देश्य केवल छात्रों को विज्ञान पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें तर्कशील, जिज्ञासु और नवोन्मेषी बनाना है। भारतीय संविधान भी नागरिकों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और जिज्ञासु प्रवृत्ति विकसित करने की सलाह देता है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए यह केंद्र छात्रों को विज्ञान और करियर के नए आयामों से जोड़ रहा है।
यहां के छात्र, जो कभी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित थे, अब अत्याधुनिक सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। उन्हें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और इंजीनियरिंग से जुड़े रोमांचक अनुभव मिल रहे हैं, जिससे उनके लिए करियर के नए रास्ते खुल रहे हैं।

“दंतेवाड़ा में अब डर नहीं, नवाचार है”
दंतेवाड़ा कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी का कहना है कि माओवादी हिंसा से घिरे क्षेत्र में इतने बड़े स्तर का विज्ञान केंद्र स्थापित करना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इसकी सफलता इस बात का संकेत है कि अब फोकस हिंसा से हटकर शिक्षा, नवाचार और अवसरों पर है। यह विज्ञान केंद्र केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि एक रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच का केंद्र है। यहां छात्र हाथों-हाथ प्रयोग कर सकते हैं, वैज्ञानिक मॉडलों से सीख सकते हैं और नवीन तकनीकों से परिचित हो सकते हैं।
विज्ञान की दुनिया में रोमांचक सफर
इस विज्ञान केंद्र को विभिन्न विषयों और वैज्ञानिक खोजों को करीब से समझने के लिए कई ज़ोन में विभाजित किया गया है:
- साइंस हब – जहां छात्र प्रयोग करके विज्ञान को समझ सकते हैं।
- मिनरल गैलरी – जो दंतेवाड़ा की खनिज संपदा को दर्शाती है।
- स्पेस ज़ोन – जहां अंतरिक्ष और ब्रह्मांड की रोमांचक दुनिया से रूबरू होने का मौका मिलता है।
- इंडस्ट्री ज़ोन – जहां मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और ऑटोमेशन से जुड़ी नई तकनीकों को समझाया जाता है।
- हाई-टेक फार्मिंग ज़ोन – जहां छात्रों को हाइड्रोपोनिक्स और स्मार्ट एग्रीकल्चर जैसी आधुनिक खेती की तकनीकों से अवगत कराया जाता है।
- ईकोस्फेयर ज़ोन – जो जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और नवीकरणीय ऊर्जा जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूक करता है।
शिक्षा का नया युग
दंतेवाड़ा साइंस सेंटर केवल विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि युवाओं को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी कार्य कर रहा है। यह केंद्र पर्यावरण, प्रौद्योगिकी और नवीनता के प्रति रुचि जगाने के साथ-साथ छात्रों को रचनात्मकता और स्वतंत्र सोच की ओर भी प्रेरित कर रहा है।
दंतेवाड़ा का नया चेहरा
एक ऐसा जिला, जहां कभी हर कदम पर भय पसरा रहता था, वहां अब विज्ञान और प्रगति की नई कहानी लिखी जा रही है। यह केंद्र न केवल छात्रों के लिए ज्ञान और अवसरों का द्वार खोल रहा है, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र में शिक्षा और नवाचार के नए युग की शुरुआत कर रहा है। दंतेवाड़ा साइंस सेंटर अब सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि संभावनाओं की प्रयोगशाला, जिज्ञासा का मंच और एक बेहतर कल की ओर बढ़ता हुआ कदम है।