नयी दिल्ली: लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर अल्पसंख्यकों के बीच भय पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ बिल का उद्देश्य मुसलमानों की धार्मिक संपत्तियों में हस्तक्षेप करना नहीं है, बल्कि संपत्तियों के बेहतर प्रशासन को सुनिश्चित करना है। शाह ने कहा कि वक्फ एक धर्मार्थ संस्था होती है, जहां संपत्ति को सामाजिक या धार्मिक उद्देश्यों के लिए दान किया जाता है, जिसे बाद में वापस नहीं लिया जा सकता।
शाह ने यह भी बताया कि सरकारी संपत्तियों को वक्फ के अंतर्गत नहीं लाया जा सकता और इसी को ध्यान में रखते हुए संशोधन लाया गया है। उन्होंने मणिपट्टी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 1.38 लाख एकड़ वक्फ भूमि किराए पर दी गई है और बड़ी संख्या में भूखंडों को 100 साल की लीज पर निजी संस्थानों को सौंपा गया है। इसके अलावा, कई चर्चों की भूमि को भी वक्फ संपत्ति घोषित किए जाने का मुद्दा उठाया गया।
दक्षिण के सांसदों की आपत्ति और चर्चों की नाराजगी का सवाल
अमित शाह ने दक्षिण भारतीय राज्यों के उन सांसदों पर भी सवाल उठाया जो इस बिल का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करके वे अपने ही क्षेत्र के चर्चों की नाराजगी मोल ले रहे हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि तेलंगाना में 1700 एकड़, असम के मोरेगांव जिले और हरियाणा के गुरुद्वारों से जुड़ी भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया है। कर्नाटक में भी एक मंदिर और 600 एकड़ जमीन पर वक्फ बोर्ड का दावा है।
शाह ने बताया कि केरल समेत दक्षिण भारतीय राज्यों के बिशप संघों ने वक्फ बिल का समर्थन किया है। ऐसे में, यदि दक्षिण के सांसद इसका विरोध करते हैं, तो वे अप्रत्यक्ष रूप से उन चर्चों के खिलाफ खड़े हो रहे हैं जो इस विधेयक के पक्ष में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अल्पसंख्यकों में भय पैदा कर भ्रम की स्थिति बना रहा है, जबकि बिल का मकसद संपत्तियों का पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करना है।