नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को भारत-चीन सीमा विवाद और अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। संसद में बोलते हुए राहुल गांधी ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर चल रहे तनाव को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और कहा कि भारत को अपनी जमीन वापस मिलनी चाहिए। राहुल गांधी ने कहा, “LAC पर यथास्थिति बनी रहनी चाहिए और हमें अपनी जमीन वापस मिलनी चाहिए। मुझे यह भी पता चला है कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने चीन को पत्र लिखा है।
लेकिन यह बात हमें अपने लोगों से नहीं, बल्कि चीनी राजदूत से पता चल रही है, जो यह बात कह रहे हैं।” उन्होंने सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर देश को अंधेरे में रखा जा रहा है। इसके साथ ही, राहुल गांधी ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए जा रहे पारस्परिक टैरिफ को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “हमारे सहयोगी ने हम पर टैरिफ लगाने का फैसला किया है। यह हमें पूरी तरह से तबाह कर देगा। भारत सरकार हमारी जमीन के बारे में क्या कर रही है और टैरिफ के मुद्दे पर आप क्या करेंगे?”
राहुल गांधी का इशारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया नीति की ओर था, जिसमें भारत के स्टील, फार्मा, टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर भारी टैरिफ लगाने की बात कही गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था, विनिर्माण और रोजगार पर गंभीर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी ने 2023 में भी लद्दाख में चीनी अतिक्रमण का मुद्दा उठाया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि चीन ने भारत की जमीन पर कब्जा कर लिया है। आज के अपने बयान में उन्होंने एक बार फिर इस मुद्दे को दोहराया और सरकार से जवाब मांगा। दूसरी ओर, भारत और चीन के बीच हाल ही में राजनयिक संबंधों में कुछ सुधार देखा गया है।
जनवरी 2025 में दोनों देशों ने पांच साल बाद सीधी हवाई सेवाएं फिर से शुरू करने और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने पर सहमति जताई थी। हालांकि, सीमा विवाद अभी भी दोनों देशों के बीच तनाव का एक बड़ा कारण बना हुआ है। अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को लेकर द हिंदू बिजनेसलाइन की एक फरवरी 2025 की रिपोर्ट में कहा गया था कि इन टैरिफ से भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा कम हो सकती है, खासकर स्टील, फार्मा और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाकर सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
लोकसभा में इस चर्चा के दौरान सभापति ने विपक्ष को बोलने का मौका दिया, लेकिन विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार इस तरह के गंभीर मुद्दों पर खुली बहस से बच रही है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने पहले भी 2020 में लद्दाख सीमा विवाद पर चर्चा की मांग की थी, लेकिन तब भी उन्हें निराशा हाथ लगी थी। राहुल गांधी के इस बयान के बाद अब सभी की नजरें सरकार के जवाब पर टिकी हैं कि वह इन दोनों मुद्दों—LAC पर तनाव और अमेरिकी टैरिफ—से कैसे निपटती है।