नई दिल्ली: संसद के दोनों सदनों ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक को पारित कर दिया। इस विधेयक के पारित होने को सामाजिक-आर्थिक न्याय, पारदर्शिता और समावेशी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण करार देते हुए कहा, “यह विधेयक उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा, जो लंबे समय से हाशिए पर रहे हैं, जिनकी आवाज अनसुनी रही और जिन्हें अवसरों से वंचित रहना पड़ा है।” उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा कि यह कदम पारदर्शिता को बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के अधिकारों की रक्षा में मददगार साबित होगा वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को पिछले साल 8 अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया था। इस विधेयक में वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने जैसे अहम बदलाव किए गए हैं, जिसने पारंपरिक रूप से मुस्लिम-नेतृत्व वाली इन संस्थाओं की संरचना को लेकर बहस छेड़ दी है।
इसके अलावा, विधेयक में वक्फ संपत्तियों की पहचान और प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए कई सुधार किए गए हैं। दो दिनों तक चली तीखी बहस के बाद राज्यसभा ने आज इस विधेयक को मंजूरी दी। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक का जोरदार समर्थन किया। हालांकि, विपक्ष ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला करार दिया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को छीनने की कोशिश है। दूसरी ओर, किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर मुस्लिम समुदाय को डराने का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ सभी के लिए काम कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि इस विधेयक का नाम अब UMEED (Unified Waqf Management Empowerment Efficiency and Development) विधेयक रखा जाएगा। वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में लंबे समय से पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी की शिकायतें रही हैं।
कई समितियों ने इस बात को रेखांकित किया था कि वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है और इनमें अतिक्रमण, रखरखाव की कमी और सर्वेक्षण में अक्षमता जैसी समस्याएं हैं। इस विधेयक के जरिए इन मुद्दों को हल करने की कोशिश की गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने संसद और संयुक्त संसदीय समिति की चर्चाओं में हिस्सा लेने वाले सभी सांसदों और सुझाव देने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “यह कदम एक सशक्त, समावेशी और संवेदनशील भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण साबित होगा।”
इस विधेयक के पारित होने के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कुछ लोगों ने इसे एक साहसिक कदम बताया, तो कुछ ने इसे लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। आने वाले दिनों में इस विधेयक का असर और इस पर लोगों की राय और साफ होगी।