Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राजनीति बड़े संकट के दौर से गुजरती दिख रही है। एक ओर तेजस्वी यादव खुद को मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं पार्टी के भीतर से ही कई दिग्गज नेता और विधायक बगावती तेवर दिखा रहे हैं। आलम यह है कि RJD के करीब आठ विधायक अब खुलकर पार्टी से दूरी बनाने लगे हैं। इनमें बाहुबली नेताओं की पत्नियां, दबंग छवि वाले पुराने नेता और यहां तक कि लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव भी शामिल हैं। इस हालात ने तेजस्वी यादव की चुनावी रणनीति और RJD की पकड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तेज प्रताप यादव, जो हसनपुर से विधायक हैं, पार्टी और परिवार दोनों से टकराव के रास्ते पर बढ़ चुके हैं। सोशल मीडिया पर उनके बयानों से लेकर सार्वजनिक मंचों पर उनके तेवर साफ कर देते हैं कि उनका झुकाव अब RJD से बाहर है। वे महुआ से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जहां पहले से ही पार्टी विधायक मौजूद हैं। इससे न केवल महुआ सीट पर सीधा असर पड़ेगा बल्कि यादव वोट बैंक में भी खिंचाव की स्थिति बनेगी।
नवादा में राजबल्लभ यादव परिवार और विभा देवी का असर किसी से छिपा नहीं है। 2020 में RJD से विधायक बनीं विभा देवी अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंच पर नजर आईं, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उनका झुकाव NDA की ओर है। नवादा और आसपास के इलाकों में यादव समाज की बड़ी पकड़ के कारण यह बदलाव RJD के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इतना ही नहीं राज बल्लभ यादव ने तेजस्वी यादव और उनकी पत्नी राज श्री पर भी अभद्र टिप्पणी की है।
इसी तरह, शिवहर से विधायक चेतन आनंद, जो बाहुबली आनंद मोहन के बेटे हैं, नीतीश सरकार के फ्लोर टेस्ट के दौरान ही पाला बदल चुके हैं। उनकी मां JDU से सांसद हैं और अब उनका झुकाव भी उसी दिशा में दिखाई दे रहा है। मोकामा की राजनीति में बाहुबली अनंत सिंह का कद किसी से कम नहीं है। उनकी पत्नी और विधायक नीलम देवी पहले ही JDU खेमे में जा चुकी हैं और अब अनंत सिंह खुद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। यह सब मिलकर RJD की जमीनी पकड़ को कमजोर कर रहा है।
रजौली से विधायक प्रकाश वीर का भाजपा के मंच पर नजर आना, सूर्यगढ़ा के विधायक प्रह्लाद यादव का NDA खेमे की ओर झुकाव और मोहनिया से विधायक संगीता कुमारी का पार्टी छोड़कर भाजपा की ओर बढ़ना, सभी संकेत देते हैं कि RJD लगातार अपने मजबूत स्तंभ खोती जा रही है। वहीं भभुआ से विधायक भरत बिंद और महनार से वीणा सिंह का मामला भी पार्टी की स्थिति को और जटिल बनाता है। खासतौर से रामा सिंह जैसे बाहुबली नेताओं का प्रभाव वैशाली और आसपास की सीटों पर गहरी छाप छोड़ सकता है।
इन सभी घटनाक्रमों का सबसे बड़ा असर RJD की चुनावी छवि और संगठनात्मक एकता पर पड़ रहा है। तेजस्वी यादव जहां NDA की नीतियों और नीतीश सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं उनके अपने विधायक धीरे-धीरे दूसरे खेमों में जाते दिख रहे हैं। जातीय समीकरणों की राजनीति करने वाली बिहार की धरती पर ऐसे बदलाव बेहद अहम साबित हो सकते हैं। खासकर तब, जब हर सीट पर बगावती चेहरों का असर 2 से 3 अन्य सीटों तक फैलता हो।






















