Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव का दूसरा और अंतिम चरण 11 नवंबर को होने वाला है और इस एक ही दिन राज्य की सियासत का भविष्य तय हो जाएगा। इस चरण में सबकी नजरें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार के उन 11 मंत्रियों पर टिकी हैं, जिनकी राजनीतिक नियति के फैसले का दिन आ चुका है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा सत्तारूढ़ गठबंधन की तीन महिला मंत्रियों पर है, जिनके लिए यह चुनाव सत्ता में वापसी का नहीं, बल्कि अपनी सियासी प्रासंगिकता बचाए रखने का सबसे बड़ा दांव है।
नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री रहीं भाजपा की रेणु देवी, जदयू की शीला मंडल और लेसी सिंह की लड़ाई इस चुनाव में सबसे दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। यह तिकड़ी न सिर्फ अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत विरोधियों से घिरी है, बल्कि उन पर ‘एंटी-इनकंबेंसी’ का दबाव भी है।
पश्चिम चंपारण की बेतिया सीट से भाजपा की कद्दावर नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी छठी बार विधायक बनने का लक्ष्य लेकर मैदान में हैं। हालांकि, इस बार उनका सामना कांग्रेस के वसी अहमद, मेयर गरिमा देवी के पति रोहित सिकारिया और जन सुराज के अनिल कुमार सिंह जैसे प्रत्याशियों से है। रेणु देवी अपने पक्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के मुद्दे और एनडीए की सरकारों के कामों को बता रही हैं।
मधुबनी की फुलपरास सीट से परिवहन मंत्री शीला मंडल की जमीन भी इस बार डोलती नजर आ रही है। कर्पूरी ठाकुर की विरासत वाली इस सीट पर शीला मंडल का मुकाबला कांग्रेस के सुबोध मंडल और जन सुराज के जलेंद्र कुमार मिश्रा से है। अति पिछड़ा वर्ग के मजबूत प्रभाव वाली इस सीट पर दोनों ही प्रमुख दलों ने इसी वर्ग के उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे मतों का बंटवारा होना तय माना जा रहा है।
वहीं, पूर्णिया के धमदाहा से जदयू की वरिष्ठ मंत्री लेसी सिंह अपना छठा कार्यकाल पाने के लिए चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन इस बार उनके रास्ते में पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा हैं, जो अब राजद के टिकट पर मैदान में हैं। कुशवाहा के प्रवेश ने सीमांचल के इस समीकरण को पूरी तरह से बदल दिया है। लेसी सिंह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास कार्यों को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बता रही हैं।
इन तीनों महिला मंत्रियों की उम्मीदें इस बार महिला वोटरों के रिकॉर्ड मतदान पर टिकी हैं। चुनाव के पहले चरण में जहां महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले 7.48 फीसदी अधिक वोटिंग की थी, वहीं दूसरे चरण में भी इसी ट्रेंड के बने रहने की उम्मीद है। इस बार कुल 255 महिला उम्मीदवार मैदान में हैं, जो कुल उम्मीदवारों का मात्र 9.75 फीसदी हैं।
महिला मंत्रियों के अलावा इस चरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे वरिष्ठ मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, भवन निर्माण मंत्री जयंत राज, नीतीश मिश्रा, जमा खान और नीरज कुमार सिंह बबलू जैसे दिग्गजों की भी राजनीतिक परीक्षा है। 11 नवंबर को पड़ने वाले मतों के परिणाम न सिर्फ एक नई सरकार का निर्धारण करेंगे, बल्कि बिहार की सियासी शक्तियों के नए केंद्रों का भी खाका खींचेंगे।






















