राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM Political Crisis) इस समय गंभीर अंदरूनी उथल-पुथल से गुजर रहा है। पार्टी के दो प्रमुख नेताओं—राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जीतेंद्र नाथ और प्रदेश प्रवक्ता सह महासचिव राहुल कुमार—ने बुधवार को सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर संगठन में हलचल तेज कर दी है। एक ही दिन में बड़े नेताओं के इस तरह पीछे हटने से साफ है कि पार्टी के भीतर असंतोष की आग अब खुलकर लपटों में बदल चुकी है।
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पार्टी सूत्र स्पष्ट संकेत देते हैं कि बगावत की चिंगारी उस समय भड़की जब RLM के संरक्षक उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा को मंत्री बनाया गया। कई वरिष्ठ नेता इसे परिवारवाद का चरम बताते हुए कह रहे हैं कि संगठन की मूल विचारधारा और काडर आधारित राजनीति को कमजोर किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कई पुराने नेताओं को दरकिनार कर परिवार को प्राथमिकता देने का आरोप अब खुलकर सामने आने लगा है।

इस्तीफा देने वाले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जीतेंद्र नाथ ने अपने पत्र में लिखा है कि वे पिछले सात वर्षों से उपेंद्र कुशवाहा के साथ कार्यरत रहे, लेकिन हाल के राजनीतिक और संगठनात्मक फैसलों से वे खुद को जोड़ नहीं पा रहे। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पार्टी में बने रहना उनके लिए नैतिक रूप से संभव नहीं है।

इसी तरह, प्रदेश प्रवक्ता और महासचिव राहुल कुमार ने भी लगभग 8–9 वर्षों की सक्रिय राजनीतिक भूमिका के बाद पार्टी नेतृत्व के हालिया निर्णयों पर गहरी असहजता जताते हुए इस्तीफा दे दिया। राहुल कुमार ने लिखा कि वर्तमान परिस्थितियों में पार्टी की दिशा और नेतृत्व शैली से वे खुद को सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे।
अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले दिनों में कई और वरिष्ठ नेता भी फैसला ले सकते हैं। माना जा रहा है कि पार्टी में नेतृत्व पर सवाल उठने और परिवारवाद के आरोपों के चलते RLM एक बड़े राजनीतिक संकट के मुहाने पर खड़ी है।






















