बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद 18वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार से शुरू हुआ और इसके उद्घाटन दिन शपथग्रहण समारोह (Bihar Assembly Oath) ने राजनीतिक, सांस्कृतिक और मानवीय सभी आयामों को छू लिया। जहां एक ओर वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और मंत्रियों की औपचारिक शपथ ने नई सरकार के गठन को मजबूती दी, वहीं दूसरी ओर विभिन्न भाषाओं में शपथ लेने वाले विधायकों ने बिहार की बहुभाषी पहचान को नए सिरे से परिभाषित किया।
सबसे पहले उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शपथ लेकर सत्र की औपचारिक शुरुआत की। उनके बाद मंत्रियों की शपथ का क्रम चला और फिर वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेम कुमार ने शपथ ली। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शपथ लेकर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के इस नए अध्याय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद विधानसभा क्रमांक के अनुसार सभी विधायकों ने शपथ ली, जिसमें बिहार की भाषाई विविधता का एक अनूठा मिश्रण दिखाई दिया।
हिंदी के बाद सबसे अधिक विधायकों ने मैथिली में शपथ लेकर मिथिलांचल की सांस्कृतिक उपस्थिति को मजबूत किया। कुल 15 विधायकों ने मैथिली में शपथ ली, जिससे सदन में भाषाई गौरव का एक अलग ही वातावरण बना। 5 विधायकों ने संस्कृत में शपथ लेकर परंपरा और शास्त्रीय विरासत की झलक पेश की, जिनमें तारकिशोर प्रसाद, रत्नेश सदा, वीरेंद्र पासवान और अन्य शामिल रहे।
अंग्रेजी में 5 विधायकों ने शपथ ली, जबकि उर्दू में भी 5 विधायकों ने शपथ लेकर बिहार की गंगा–जमुनी तहज़ीब को मजबूत संदेश दिया। इतनी विविधता शायद ही किसी अन्य विधानसभा के शपथग्रहण में देखने को मिलती है, जो दर्शाता है कि बिहार की राजनीति सिर्फ सत्ता का समीकरण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता की अभिव्यक्ति भी है।
शपथग्रहण के दौरान कुछ विधायकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के विधायक मनोज विश्वास तीन बार कोशिश करने के बाद शपथ पूरी कर सके। पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी भी दो बार में अपनी शपथ पूरी कर पाईं। राजद विधायक अनीता कुमारी ने तय शपथ पत्र से अलग शपथ लेने की कोशिश की, जिसे प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव ने रोकते हुए उन्हें नियमों के अनुरूप शपथ लेने को कहा। बाद में उन्होंने सही स्वरूप में शपथ ली।

नवादा के बाहुबली विधायक राजबल्लभ यादव की पत्नी और जदयू विधायक विभा देवी को शपथ पत्र पढ़ने में कठिनाई हुई। पास में मौजूद पूर्व विधायक मनोरमा देवी ने उन्हें पंक्तियाँ पढ़कर सुनाईं, जिसके बाद वह शपथ पूरी कर सकीं।






















