बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र (Bihar Vidhansabha Winter Session) के पहले ही दिन सदन में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने पूरे राजनीतिक गलियारों का तापमान बदल दिया। नई सरकार के गठन के बाद सदन में शपथ ग्रहण की औपचारिकता चल रही थी, तभी एक पल ऐसा आया जिसने कद, कद्र और संबंधों की राजनीति को नया संदर्भ दे दिया। जैसे ही BJP विधायक और कभी लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी रहे रामकृपाल यादव की नज़र नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर पड़ी, वे मुस्कुराते हुए आगे बढ़े और बड़े आत्मीय भाव से उन्हें गले लगा लिया। यह आलिंगन कुछ सेकंड का था, लेकिन इसका राजनीतिक संदेश असाधारण रूप से गहरा साबित हुआ।
तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया भी उतनी ही गर्मजोशी भरी थी। दोनों नेताओं के बीच की यह मुलाकात बता गई कि कटु सियासी बयानबाज़ी और चुनावी आरोप-प्रत्यारोप से इतर, व्यक्तिगत संबंधों की अपनी एक अलग दुनिया होती है। इस दृश्य ने यह याद दिला दिया कि राजनीति में मतभेदों की जगह हो सकती है, लेकिन मनभेद हर बार जरूरी नहीं होते।
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सत्र के दौरान तेजस्वी यादव की अन्य नेताओं के साथ की गई बातचीत भी चर्चा का विषय बनी रही। बसपा के इकलौते विधायक सतीश यादव से उनकी लंबी बातचीत ने राजनीतिक अटकलों को हवा दी, क्योंकि हाल के दिनों में उनके पाला बदलने की संभावनाओं को लेकर खूब चर्चाएँ रही हैं। हालांकि तेजस्वी ने स्पष्ट किया कि बातचीत केवल सतीश यादव के बीमार पिता के स्वास्थ्य को लेकर थी।
इसी तरह चेतन आनंद से बातचीत ने भी राजनीतिक संवाद को एक मानवीय परत दी। चेतन आनंद पिछली बार राजद से जीते थे, लेकिन बाद में उन्होंने दल बदल लिया और इस बार वे जदयू के टिकट पर जीतकर आए हैं। हाल ही में उनके चचेरे भाई के निधन के बाद तेजस्वी द्वारा की गई संवेदनात्मक बातचीत ने सदन के माहौल को और अधिक मानवीय बना दिया।






















