मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar Hijab Controversy) से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। वीडियो नियुक्ति पत्र वितरण समारोह का बताया जा रहा है, जिसमें एक महिला चिकित्सक के हिजाब को लेकर मुख्यमंत्री का व्यवहार चर्चा का विषय बन गया है। इसी को आधार बनाकर विपक्षी दलों ने न सिर्फ सवाल उठाए हैं, बल्कि इसे महिलाओं के सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़ते हुए बड़ा सियासी मुद्दा बना दिया है।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस तरह से एक मुख्यमंत्री को किसी महिला का नकाब हटाने की कोशिश करते हुए देखा गया, वह पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाती है कि वह हर नागरिक की निजी आस्था और सम्मान का ख्याल रखे। डिंपल यादव की टिप्पणी के बाद यह मामला केवल बिहार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर बहस का हिस्सा बन गया।
हिजाब विवाद में नीतीश के समर्थन में पप्पू, पत्नी ने सुनाई खरी-खोटी
आम आदमी पार्टी की बिहार इकाई ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो साझा करते हुए मुख्यमंत्री की मंशा और व्यवहार पर सवाल खड़े किए। पार्टी ने इसे महिला सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि यदि फोटो खिंचवाने की इच्छा थी तो महिला से अनुरोध किया जा सकता था, स्वयं हाथ लगाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री पहले भी महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियों और व्यवहार को लेकर विवादों में रहे हैं, जो एक बार फिर उनकी छवि पर सवाल खड़े करता है।
विवाद यहीं नहीं रुका। कांग्रेस नेता अलका लांबा ने तो अपने बयान में भाषा को और ज्यादा तीखा करते हुए मुख्यमंत्री के आचरण को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार सत्ता में बैठे किसी भी व्यक्ति के लिए अस्वीकार्य है और यह महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है। अलका लांबा के बयान ने इस मुद्दे को और ज्यादा राजनीतिक धार दे दी है, जिससे विपक्षी दल एक सुर में नीतीश कुमार पर हमलावर नजर आ रहे हैं।




















