दक्षिण एशिया की राजनीति में उथल-पुथल के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor Warning) का बयान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। बांग्लादेश में उभर रहे राजनीतिक हालात पर गहरी चिंता जताते हुए थरूर ने साफ शब्दों में कहा है कि वहां भीड़तंत्र का वर्चस्व लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है और इसका असर केवल बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत समेत पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ेगा।
शशि थरूर के मुताबिक, हालिया रिपोर्टें यह संकेत दे रही हैं कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक संस्थाएं दबाव में हैं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधे हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रेस किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ होता है, लेकिन जब मीडिया संस्थानों को निशाना बनाया जाने लगे तो यह संकेत होता है कि हालात बेहद चिंताजनक हैं। प्रोथोम आलो और डेली स्टार जैसे प्रतिष्ठित मीडिया हाउसों के दफ्तरों में आगजनी और हमलों का जिक्र करते हुए थरूर ने कहा कि पत्रकारों को अपनी जान बचाने के लिए हड़बड़ी में संदेश पोस्ट करने की नौबत नहीं आनी चाहिए। यह स्थिति लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है और इसे किसी भी सूरत में सामान्य नहीं माना जा सकता।
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शशि थरूर ने यह भी रेखांकित किया कि भीड़तंत्र जब कानून और संस्थाओं से ऊपर होने लगे, तो वह केवल आंतरिक संकट नहीं रहता, बल्कि पड़ोसी देशों के लिए भी जोखिम पैदा करता है। भारत और बांग्लादेश के बीच गहरे सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, ऐसे में वहां की अस्थिरता का असर सीमा पार भी महसूस किया जा सकता है। उन्होंने भारत को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा बेहद जरूरी है।
इसी क्रम में थरूर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े एक वायरल वीडियो पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें एक महिला का हिजाब हटाने की कोशिश का आरोप सामने आया था। थरूर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुसलमान महिलाओं समेत सभी महिलाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और इस तरह का व्यवहार किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मौजूद नेताओं को विशेष रूप से संवेदनशीलता और मर्यादा का पालन करना चाहिए, क्योंकि उनके आचरण से समाज को संदेश जाता है।




















