दरभंगा जिले में बुधवार को उस समय कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब एनएच-27 (Darbhanga News: NH-27 Jam) पर बसेला चौक के पास एक संदिग्ध मौत के विरोध में परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर हाईवे जाम कर दिया। यह जाम करीब दो घंटे तक चला, जिससे बिहार की इस महत्वपूर्ण लाइफलाइन पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को भीषण गर्मी व असुविधा का सामना करना पड़ा। यह घटना केवल एक सड़क जाम तक सीमित नहीं रही, बल्कि राज्य में न्याय व्यवस्था और शासन की स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई।
मृतक की पहचान रामसेवक राम के रूप में हुई है, जो वैशाली जिले में स्थित एक लाइन होटल में रसोइए के तौर पर काम करते थे। परिजनों का आरोप है कि होटल में काम करने के दौरान ही उनकी हत्या कर दी गई। बताया गया कि ‘देसी मसाला’ नाम से होटल चलाने वाले मालिक ने फोन कर परिवार को रामसेवक की मौत की सूचना दी। अचानक आई इस खबर से परिवार सदमे में आ गया और दरभंगा से पाँच लोग तत्काल वैशाली स्थित होटल के लिए रवाना हुए।
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परिजनों का कहना है कि होटल पहुँचने पर उन्हें बताया गया कि पोस्टमार्टम पहले ही कराया जा चुका है। जब परिवार ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफआईआर और अन्य कानूनी कागजात माँगे, तो होटल प्रबंधन कोई भी दस्तावेज़ दिखाने में असमर्थ रहा। उल्टा, शव को जल्द से जल्द ले जाने का दबाव बनाया गया। इस रवैये ने परिवार के संदेह को और गहरा कर दिया। उनका आरोप है कि पूरे मामले को जल्दबाजी में दबाने की कोशिश की जा रही है।
शव लेकर जब परिजन दरभंगा लौटे तो उन्होंने स्थानीय पुलिस से संपर्क कर मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की। परिजनों का दावा है कि उन्हें पुलिस स्तर पर तत्काल और संतोषजनक कार्रवाई का भरोसा नहीं मिला। इसी नाराज़गी और असहायता के भाव ने आक्रोश का रूप ले लिया और परिजनों के साथ स्थानीय लोगों ने एनएच-27 को जाम कर दिया। देखते ही देखते हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और प्रशासन के लिए स्थिति संभालना चुनौती बन गई।
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इसी दौरान विकासशील इंसान पार्टी के सुप्रीमो और पूर्व मंत्री मुकेश साहनी भी जाम में फँस गए। जब उन्हें मामले की जानकारी मिली तो वे स्वयं मौके पर पहुँचे और पीड़ित परिवार से बातचीत की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला। मुकेश साहनी ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और आम लोगों का न्याय से भरोसा उठ गया है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद बीमार हैं और पूरी सरकार कॉलेप्स हो चुकी है। उनका बयान मौके पर मौजूद लोगों में चर्चा का विषय बन गया और घटना को राजनीतिक रंग भी मिल गया।
करीब दो घंटे तक चले इस हाईवे जाम के दौरान प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार बातचीत होती रही। अंततः अधिकारियों ने निष्पक्ष जाँच, होटल मालिक पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। आश्वासन के बाद परिजनों ने जाम हटाया, जिसके बाद यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका।






















