Bihar Railway Update: पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले प्रमुख स्टेशनों पर रोज़ाना उमड़ने वाली भीड़, प्लेटफॉर्म पर जगह की कमी और ट्रेनों के लंबे इंतज़ार की समस्या आने वाले वर्षों में इतिहास बनने जा रही है. यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या और रेल यातायात पर बढ़ते दबाव को देखते हुए रेलवे ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है. गया जंक्शन सहित पूर्व मध्य रेलवे के कई बड़े और व्यस्त स्टेशनों की संचालन क्षमता अगले पांच वर्षों में दोगुनी की जाएगी, जिससे बिहार का रेल नेटवर्क पूरी तरह नई शक्ल में सामने आएगा.
रेलवे का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक इस महत्वाकांक्षी योजना को ज़मीनी स्तर पर उतार दिया जाए. इसके लिए केवल मौजूदा ढांचे में सुधार ही नहीं, बल्कि नई रेल लाइनों के निर्माण, कोचिंग टर्मिनलों के विस्तार और परिचालन क्षमता को आधुनिक तकनीक से लैस करने पर भी जोर दिया जा रहा है. रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इससे न सिर्फ ट्रेनों की संख्या में इजाफा होगा, बल्कि यात्रियों को भीड़ से राहत, समय पर ट्रेनें और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी.
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पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले गया, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, पटना, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जैसे बड़े स्टेशन भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं. इन शहरों से होकर गुजरने वाले रेल रूट पर पिछले कुछ वर्षों में यात्री यातायात के साथ-साथ माल ढुलाई में भी तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यही कारण है कि रेलवे ने इन स्टेशनों पर ट्रेनों के संचालन की क्षमता मौजूदा स्तर से दोगुनी करने का निर्णय लिया है, ताकि बढ़ते दबाव को संतुलित किया जा सके.
पूर्व मध्य रेलवे की मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र के अनुसार, यह पूरी योजना रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के उस दीर्घकालिक विजन का हिस्सा है, जिसमें यात्रियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है. रेलवे का फोकस स्टेशनों पर भीड़ को नियंत्रित करने, परिचालन को अधिक सुचारु बनाने और नेटवर्क को आधुनिक बनाने पर है. इसी दिशा में विभिन्न शहरों में कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार और सेक्शनल क्षमता में निरंतर वृद्धि की जा रही है.
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इस योजना की सबसे अहम कड़ी पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन से झाझा के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण है. लगभग 400 किलोमीटर लंबे इस व्यस्त रेल खंड पर नई लाइनों के निर्माण के लिए करीब 17 हजार करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है. रेलवे सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना की प्रक्रिया अगले कुछ महीनों में शुरू हो सकती है, जिसके बाद इस कॉरिडोर पर ट्रेनों की आवाजाही कहीं अधिक तेज़ और व्यवस्थित हो जाएगी.
धार्मिक और पर्यटन के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण गया जंक्शन को इस योजना से सबसे बड़ी राहत मिलने वाली है. बोधगया और पितृपक्ष मेले के दौरान यहां यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, जिससे स्टेशन पर भारी दबाव बनता है. संचालन क्षमता दोगुनी होने से विशेष ट्रेनों के संचालन, बेहतर प्लेटफॉर्म प्रबंधन और समयबद्ध परिचालन में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. इसी तरह पटना, डीडीयू जंक्शन और अन्य प्रमुख स्टेशनों पर भी ट्रेनों की लेटलतीफी कम होने और कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है.
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रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह निवेश केवल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा. बेहतर रेल नेटवर्क से बिहार और आसपास के राज्यों में व्यापार, उद्योग और पर्यटन को नई गति मिलेगी. साथ ही निर्माण और संचालन के दौरान रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे.






















