बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में बुधवार को एक अहम और दूरगामी असर डालने वाला फैसला सामने आया, जब राज्य के सबसे सीनियर आईपीएस अधिकारी और पूर्व डीजीपी आलोक राज को बिहार कर्मचारी चयन आयोग (Alok Raj appointed BSSC Chairman) का स्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। खास बात यह रही कि यह जिम्मेदारी उन्हें उसी दिन सौंपी गई, जिस दिन वे बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए। आज उन्होंने पदभार ग्रहण कर लिया है।
आलोक राज बीते एक वर्ष से आयोग में कार्य कर रहे थे और अब औपचारिक रूप से उन्हें अगले पांच वर्षों यानी 65 वर्ष की आयु तक BSSC अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है। इसका सीधा संकेत यह है कि सरकार भर्ती प्रक्रियाओं में निरंतरता और स्थिरता चाहती है। बिहार जैसे राज्य में, जहां सरकारी नौकरियों की परीक्षाएं और चयन प्रक्रियाएं अक्सर सुर्खियों में रहती हैं, वहां एक सख्त, अनुशासित और साफ छवि वाले अधिकारी की तैनाती को बड़ा संदेश माना जा रहा है।
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1989 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक राज का जन्म 15 दिसंबर 1965 को हुआ था। उनकी पहचान एक तेज-तर्रार, निर्णयक्षम और पारदर्शी प्रशासक की रही है। बतौर आईपीएस उन्होंने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में चुनौतीपूर्ण हालात में सेवाएं दीं। अविभाजित बिहार में रांची, पश्चिम सिंहभूम, गुमला, देवघर और हजारीबाग जैसे संवेदनशील जिलों के साथ-साथ सीतामढ़ी और बेगूसराय में पुलिस अधीक्षक के रूप में उनकी कार्यशैली की मिसाल दी जाती है। पश्चिमी सिंहभूम में वन माफिया, हजारीबाग में कोयला माफिया और नक्सलियों के खिलाफ उनके अभियानों को आज भी याद किया जाता है।
केंद्रीय स्तर पर भी उनका अनुभव कम अहम नहीं रहा। 2004 से 2011 तक उन्होंने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। नंदीग्राम में टाटा नैनो प्लांट के विरोध के दौरान हुए हिंसक आंदोलन के समय कई दिनों तक मोर्चा संभालना उनके करियर का चर्चित अध्याय रहा। CRPF में रहते हुए उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें डीजी की प्रशंसा डिस्क से सम्मानित किया गया।
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उनके लंबे और साहसिक सेवा काल को कई राष्ट्रीय सम्मानों से भी मान्यता मिली। 1994 में पुलिस वीरता पदक, 2008 में सराहनीय सेवा पदक और 2016 में विशिष्ट सेवा पदक के साथ-साथ 2019 में अटल रत्न सम्मान उनके खाते में दर्ज है। तीन बार राष्ट्रपति पदक मिलना उनके अनुकरणीय पुलिसिंग का प्रमाण माना जाता है।
अब जब आलोक राज BSSC के अध्यक्ष पद पर हैं, तो राज्य की तमाम भर्तियों, परीक्षाओं और आयोग से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। जानकारों का मानना है कि उनकी सख्त कार्यशैली, समयबद्ध निर्णय और शून्य सहनशीलता की नीति से आयोग की साख मजबूत हो सकती है। युवाओं के बीच लंबे समय से चली आ रही यह मांग कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो, उस दिशा में यह नियुक्ति एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।






















