Upendra Kushwaha: बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी भूचाल के संकेत मिलने लगे हैं। राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा अब सिर्फ अंदरूनी असंतोष नहीं, बल्कि खुले विद्रोह के दौर में पहुंचती दिख रही है। पार्टी के बागी विधायक के तीखे बयान ने यह साफ कर दिया है कि RLM में टूट की आशंका अब महज अटकल नहीं, बल्कि सियासी हकीकत बनने की ओर बढ़ रही है। विधायक ने यहां तक कह दिया कि वे राजनीति से संन्यास लेना बेहतर समझेंगे, लेकिन ऐसे नेतृत्व के पास वापस नहीं जाएंगे, जो कहता कुछ है और करता कुछ और।
बाजपट्टी से विधायक रामेश्वर महतो ने मीडिया से बातचीत में अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उनकी बातों में सिर्फ व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि उन कार्यकर्ताओं की आवाज भी झलकती रही, जो बीते दो दशकों से कुशवाहा के साथ खड़े रहे हैं। महतो का कहना था कि राजनीति उनके लिए पेट पालने का जरिया नहीं है। जरूरत पड़ी तो वे दुकान चला लेंगे, लेकिन सिद्धांतों से समझौता कर राजनीति नहीं करेंगे।
रामेश्वर महतो ने अपनी नाराजगी के दौरान राबड़ी देवी के परिवार का जिक्र कर सियासी बहस को और धार दे दी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनीं, तो करीब 20 साल बाद उनके बेटों ने चुनाव लड़ा, विधायक बने और मंत्री बने। फिर यह सवाल क्यों नहीं पूछा जाता कि उपेंद्र कुशवाहा के बेटे ने कौन सा चुनाव लड़ा। उनके इस बयान को पार्टी में परिवारवाद बनाम संघर्ष की राजनीति के टकराव के रूप में देखा जा रहा है। महतो ने तीखे लहजे में कहा कि समाजसेवा की बात करने वाले अगर सत्ता का स्वाद चखने में ही लग जाएं, तो फिर जमीनी कार्यकर्ताओं का भविष्य क्या होगा।
विधायक ने यह भी कहा कि एक ही परिवार में चार-चार पद होंगे, तो जो कार्यकर्ता सालों से जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं, वे कहां जाएंगे। उनके घर का चूल्हा कौन जलाएगा। आंखों में आंसू लिए खड़े वे कार्यकर्ता, जो 20 साल से पार्टी का झंडा ढो रहे हैं, आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। रामेश्वर महतो के मुताबिक, विचारों का यह टकराव ही असली विवाद की जड़ है, न कि किसी तरह का व्यक्तिगत लालच।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि चार दिसंबर को उपेंद्र कुशवाहा से आखिरी बार उनकी बातचीत हुई थी। उसके बाद से कोई संवाद नहीं हुआ। इसी संवादहीनता ने पार्टी के भीतर की खाई को और चौड़ा कर दिया। माना जा रहा है कि कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने के बाद ही असंतोष खुलकर सामने आया। इसके बाद विधायक रामेश्वर महतो, आलोक सिंह और माधव आनंद ने न केवल नाराजगी जताई, बल्कि कुशवाहा के घर हुई लिट्टी पार्टी से दूरी बना ली।






















