बिहार सरकार ने सड़क सुरक्षा (Bihar Road Safety) को लेकर एक महत्वपूर्ण और जनहितकारी कदम उठाया है। राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और समय पर इलाज न मिलने से होने वाली मौतों को देखते हुए परिवहन विभाग ने उन लोगों को पुरस्कृत करने की योजना का विस्तार किया है, जो हादसे में घायल हुए व्यक्तियों को अस्पताल पहुँचाने में मदद करते हैं। अब तक यह सहायता राशि 10 हजार रुपये थी, लेकिन सरकार ने इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया है, जिससे गंभीर दुर्घटना की स्थिति में लोगों को डर या हिचकिचाहट के बिना आगे आने का प्रोत्साहन मिल सके। यह फैसला केवल आर्थिक मदद का नहीं, बल्कि संवेदनशील समाज निर्माण की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है।
परिवहन विभाग इस योजना को ज़मीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने और अधिक से अधिक लोगों तक जानकारी पहुँचाने के लिए राज्यभर में सक्रिय हो गया है। सभी जिलों में विशेष टीमें गठित की गई हैं और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि होर्डिंग, पोस्टर और जनसंचार माध्यमों का उपयोग कर आम नागरिकों को जागरूक किया जाए। विभाग की कोशिश है कि हादसों के समय लोग “गुड सेमैरिटन” की भूमिका निभाते हुए घायलों तक तुरंत सहायता पहुँचाएं और उनके इलाज में देरी न हो।
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बिहार में ड्राइवरों की भूमिका इस योजना के केंद्र में है। परिवहन विभाग ने पिछले दो दिनों में 500 से अधिक चालकों को ‘सेफ ड्राइविंग’ प्रशिक्षण दिया है। इसमें न केवल ऐप आधारित कैब ड्राइवरों जैसे ओला-उबर बल्कि ऑटो चालकों को भी शामिल किया गया। प्रशिक्षण के दौरान यह विशेष रूप से समझाया गया कि हादसा होते ही मौके पर सबसे पहले वाहन चालक पहुँचते हैं, ऐसे में यदि वे घायलों को अस्पताल ले जाने में सहायता करें तो अनगिनत कीमती जानें बचाई जा सकती हैं। इसी सोच ने प्रोत्साहन राशि को बढ़ाने की दिशा में सरकार को प्रेरित किया।
प्रशिक्षकों द्वारा ड्राइविंग के दौरान मोबाइल उपयोग, तेज रफ्तार, सीट बेल्ट या हेलमेट न पहनना और थकान की स्थिति में ड्राइविंग जैसे जोखिम भरे व्यवहार पर गंभीर चिंता जताई गई। यह भी बताया गया कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का व्यक्तिगत अनुशासन है। चालकों को सलाह दी गई कि सुरक्षित गति से वाहन चलाएं, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग अनिवार्य करें और सड़क पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें। इससे दुर्घटनाओं की दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
परिवहन विभाग के सचिव राजकुमार ने स्पष्ट कहा कि सड़क दुर्घटना के शुरुआती मिनट बेहद कीमती होते हैं, जिन्हें “गोल्डन अवर” कहा जाता है। इस दौरान अगर घायल को प्राथमिक चिकित्सा तथा अस्पताल तक ले जाने की सहायता मिल जाए तो मौतों और गंभीर विकलांगता के मामलों में भारी कमी आ सकती है। इसी वजह से सरकार ने इनाम राशि को बढ़ाते हुए इसे सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का निर्णय लिया। जिला स्तर पर बनाई गई टीमें प्रशिक्षण और प्रचार के माध्यम से योजना को प्रभावी बनाने में जुटी हैं।





















