आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव (BMC Election) से पहले मुंबई की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। दादर के ऐतिहासिक शिवतीर्थ मैदान में आयोजित विशाल जनसभा ने यह साफ कर दिया कि BMC चुनाव सिर्फ नगर निकाय का चुनाव नहीं, बल्कि भाषा, पहचान और मुंबई के भविष्य को लेकर सियासी निर्णायक लड़ाई बनने जा रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंच से एक सुर में मराठी एकता और मुंबई की अस्मिता का मुद्दा उठाया।
राज ठाकरे ने अपने तीखे और आक्रामक अंदाज में कहा कि महाराष्ट्र की भाषा, जमीन और पहचान पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लोगों द्वारा कथित तौर पर हिंदी थोपने की कोशिशों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि किसी भी भाषा से उन्हें नफरत नहीं है, लेकिन जबरन थोपे जाने का विरोध किया जाएगा। राज ठाकरे के बयान ने यह संदेश दिया कि आने वाले चुनाव में भाषा और स्थानीय अस्मिता MNS का प्रमुख हथियार होंगे।
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राज ठाकरे ने कॉरपोरेट दखल और मुंबई के नियंत्रण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कुछ ताकतें अब भी इस बात से असहज हैं कि मुंबई गुजरात के बजाय महाराष्ट्र का हिस्सा बनी। उन्होंने आरोप लगाया कि अडाणी ग्रुप के जरिए मुंबई और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन पर नियंत्रण की कोशिशें की जा रही हैं और राज्य के कई बड़े प्रोजेक्ट्स में कॉरपोरेट भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उनके इस बयान को मुंबई के आर्थिक और राजनीतिक नियंत्रण को लेकर बड़ी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि हर चुनाव से पहले हिंदू-मुस्लिम और मराठी-गैर मराठी जैसे मुद्दों को उछालकर राजनीति की जाती है। उन्होंने कहा कि मराठी मानुष, हिंदुओं और महाराष्ट्र के हित में उन्होंने अपने सभी मतभेद भुला दिए हैं। उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा मुंबई को अपने कब्जे में लेना चाहती है, लेकिन ठाकरे परिवार ऐसा कभी होने नहीं देगा।
उद्धव ठाकरे ने भाजपा के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि मौजूदा राजनीति अब ‘नेशन फर्स्ट’ नहीं, बल्कि ‘करप्शन फर्स्ट’ की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने मुंबई के विकास को लेकर भी तीखा कटाक्ष किया और कहा कि लोगों से पूछा जाना चाहिए कि 25 साल में शिवसेना ने क्या किया और बीते कुछ वर्षों में मुंबई को कैसे नुकसान पहुंचाया गया। उनके भाषण में बालासाहेब ठाकरे की विरासत और संघर्ष का भी उल्लेख रहा, जिससे भावनात्मक जुड़ाव साफ झलका।
सभा के दौरान उद्धव ठाकरे ने देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तंज कसते हुए कहा कि विकास और राष्ट्रवाद के नाम पर सिर्फ बयानबाजी हो रही है। उन्होंने ‘आडानीवाद’ शब्द का इस्तेमाल कर यह संकेत दिया कि मुंबई के संसाधनों और पहचान को बड़े कॉरपोरेट हितों के हवाले किया जा रहा है। उनका सवाल था कि क्या मुंबई को फिर से ‘बॉम्बे’ बनाने की कोई सियासी चाल चल रही है।



















