Arcade Business College Patna: पटना के राजेंद्र नगर स्थित आरकेड बिजनेस कॉलेज का परिसर उस वक्त भावनाओं, संवेदनाओं और साहित्यिक ऊर्जा से भर उठा, जब मंच से एक नेत्रहीन कवि ने शब्दों के सहारे ऐसी तस्वीर खींची कि श्रोता देर तक खामोश रहे। खंडवा, मध्य प्रदेश से आए प्रख्यात नेत्रहीन कवि अकबर ताज की पंक्तियां- “मुझे अंधा बनाया है तो इसका गम नहीं मुझको, मेरी संतान को भगवान मगर श्रवण बना देना”– जैसे ही सभागार में गूंजीं, छात्रों की आंखें अपने आप भर आईं। यह दृश्य सिर्फ एक कविता का असर नहीं था, बल्कि समाज, संस्कार और जिम्मेदारी पर गहरी चोट करने वाला क्षण था।

आरकेड बिजनेस कॉलेज द्वारा आयोजित ‘काव्य गंगा’ कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए छात्रों को हंसाया, रुलाया और सोचने पर मजबूर कर दिया। अकबर ताज की कविताएं केवल व्यक्तिगत पीड़ा का बयान नहीं थीं, बल्कि वे आत्मसम्मान, राष्ट्रप्रेम और अगली पीढ़ी के संस्कारों की मजबूत मांग भी थीं। जब उन्होंने कहा कि लोग उनसे पूछते हैं कि आंखों की रोशनी न होने के बावजूद वे देश के लिए क्या कर सकते हैं, तो उनका जवाब सीधे दिल में उतर गया। उन्होंने साफ कहा कि शरीर भले ही जख्मी हो, लेकिन हौसले आज भी जिंदा हैं और देश के लिए कुर्बानी देने का जज्बा उनकी आने वाली पीढ़ी में कायम रहेगा।



काव्य गंगा के मंच पर नारी शक्ति की आवाज भी पूरे आत्मविश्वास के साथ सुनाई दी। प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश से आईं श्रृंगार रस की कवयित्री प्रीति पांडे ने अपनी रचना के जरिए महिलाओं को सिर्फ सम्मान ही नहीं, बल्कि चेतना का संदेश भी दिया। उनकी पंक्तियां— “ये मां हैं, पत्नी-बेटियां हैं, इन्हें अपने चरणों की दासी न समझो”—सभागार में बैठे युवाओं के लिए एक सामाजिक पाठ की तरह थीं। कविता के जरिए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि नारी को समझने का नजरिया बदले बिना समाज का विकास अधूरा है।
वहीं माहौल को हल्का और ऊर्जा से भरने का जिम्मा आगरा से आए हास्य कवि एलेश अवस्थी ने संभाला। उनकी व्यंग्यात्मक कविताओं ने छात्रों को ठहाकों से लोटपोट कर दिया। गंभीर विषयों के बीच हास्य का यह प्रवाह कार्यक्रम को संतुलित और जीवंत बनाता नजर आया। साहित्य की यही खूबी है कि वह एक ही मंच पर आंखें नम भी करता है और चेहरे पर मुस्कान भी ले आता है।
कार्यक्रम में मौजूद पटना साहिब के विधायक रत्नेश कुशवाहा ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को साहित्य से जोड़ना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने युवाओं से मोबाइल स्क्रीन टाइम कम करने की अपील करते हुए कहा कि किताबें और साहित्य न सिर्फ सोचने की क्षमता बढ़ाते हैं, बल्कि जीवन को सही दिशा भी देते हैं। विधायक कुशवाहा का मानना था कि ऐसे आयोजन युवाओं को संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं।
कुम्हरार के विधायक संजय गुप्ता ने अपने संबोधन में बिहार से बाहर हो रहे पलायन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण अब पलायन की दर में कमी आई है और इसे और कम करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। उनका मानना था कि शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक चेतना के मेल से ही बिहार का भविष्य मजबूत हो सकता है।
कार्यक्रम के अंत में कॉलेज के निदेशक और करियर काउंसलर आशीष आदर्श ने उपस्थित विधायकों और कवियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि काव्य गंगा जैसे आयोजन छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन की गहराई समझने का अवसर देते हैं। कॉलेज प्रशासन का यह प्रयास छात्रों को संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार समाज का हिस्सा बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम माना गया।
कुल मिलाकर आरकेड बिजनेस कॉलेज में आयोजित काव्य गंगा सिर्फ एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह भावनाओं, विचारों और सामाजिक संदेशों का संगम बन गया। अकबर ताज की संवेदनशील पंक्तियों से लेकर हास्य और नारी सशक्तिकरण तक, इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि कविता आज भी समाज को आईना दिखाने की ताकत रखती है।






















