बिहार में रोजगार (Belchi Rojgar Mela) को लेकर चल रही सरकारी पहलों को जमीनी स्तर पर मजबूती देने की कड़ी में बाढ़ अनुमंडल के बेलछी प्रखंड कार्यालय परिसर में आयोजित रोजगार मेला खास चर्चा का विषय बना। इस आयोजन ने न सिर्फ स्थानीय युवाओं की उम्मीदों को नया आधार दिया, बल्कि यह भी दिखाया कि सरकारी योजनाएं अब कागजों से निकलकर मैदान में उतर रही हैं। आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों युवक और युवतियां रोजगार की तलाश में मेले में पहुंचे, जिससे पूरे परिसर में उत्साह और सक्रियता का माहौल नजर आया।
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने दीप प्रज्वलन के साथ रोजगार मेले का उद्घाटन किया और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। उनके संबोधन में रोजगार को लेकर सरकार की सोच और भविष्य की रणनीति साफ झलकती दिखी। मंत्री ने बताया कि इस रोजगार मेले में दो हजार से अधिक युवाओं ने पंजीकरण कराया है, जिनमें से लगभग तीन सौ को तत्काल रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार के हर प्रखंड में इस तरह के रोजगार मेलों का आयोजन किया जा रहा है ताकि युवाओं को अपने ही क्षेत्र में अवसर मिल सके।

मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सरकार केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। चयनित अभ्यर्थियों को 32 हजार से 35 हजार रुपये तक मासिक वेतन मिलने की बात कही गई, जो ग्रामीण इलाकों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा साबित हो सकता है। यह पहल राज्य में पलायन की समस्या को कम करने में भी मददगार मानी जा रही है।
स्थानीय लोगों ने बेलछी से पटना के लिए सरकारी बस सेवा की मांग भी उठाई। इस पर मंत्री ने भरोसा दिलाया कि मार्च महीने में परिवहन विभाग को 159 नई बसें मिलने वाली हैं, जिसके बाद बेलछी जैसे क्षेत्रों में बस सेवा शुरू करने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल बिहार के भीतर और बाहर सरकारी बसों का संचालन किया जा रहा है और पर्व-त्योहारों के दौरान यात्रियों को विशेष सुविधाएं दी जाती हैं।
रोजगार मेले का सबसे अहम पहलू महिलाओं को लेकर सरकार की नई सोच रही। मंत्री ने दोहराया कि बिहार सरकार का लक्ष्य हर परिवार की एक महिला सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराना है। जीविका से जुड़ी महिलाओं को आगे बढ़ाने को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। पहले जहां महिलाओं को स्वरोजगार के लिए दस-दस हजार रुपये की सहायता दी जाती थी, वहीं अब इस राशि को बढ़ाकर दो-दो लाख रुपये करने की योजना की समीक्षा हो रही है।






















