बिहार में जमीन से जुड़े विवाद (Bihar Land Measurement) और सरकारी प्रक्रियाओं में देरी लंबे समय से आम लोगों की सबसे बड़ी परेशानी रही है। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस दिशा में बड़ा और निर्णायक कदम उठाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर स्पष्ट किया है कि नई सरकार के गठन के तुरंत बाद शुरू किए गए ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए लगातार ठोस फैसले लिए जा रहे हैं। खासकर ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ यानी Ease of Living को केंद्र में रखकर भूमि मापी जैसी जटिल प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का रोडमैप तैयार किया गया है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में अक्सर यह देखा गया है कि जमीन मापी के लिए आवेदन करने के बाद लोगों को महीनों इंतजार करना पड़ता है। इस देरी के कारण न केवल नागरिकों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है, बल्कि समय पर मापी नहीं होने से अनावश्यक भूमि विवाद भी जन्म लेते हैं। यही वजह है कि सरकार ने भूमि मापी की व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव करने का फैसला लिया है, ताकि सरकारी तंत्र जनता के लिए सहयोगी और भरोसेमंद बन सके।
नई व्यवस्था के तहत सबसे पहले लंबित मामलों पर फोकस किया गया है। सरकार ने 31 जनवरी 2026 तक विशेष भूमि मापी अभियान चलाकर सभी पेंडिंग आवेदनों के निपटारे का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही 1 अप्रैल 2026 से एक नई समय-सीमा आधारित प्रणाली लागू होगी, जिसमें अविवादित जमीन की मापी शुल्क जमा होने के अधिकतम सात कार्य दिवस के भीतर और विवादित जमीन की मापी अधिकतम ग्यारह कार्य दिवस में पूरी करने का प्रावधान किया गया है। इससे साफ है कि सरकार अब जमीन मापी को अनिश्चित प्रक्रिया नहीं, बल्कि तय समय में पूरी होने वाली सेवा बनाना चाहती है।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि मापी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अमीन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट निर्धारित पोर्टल पर समय पर अपलोड हो। नियम के अनुसार मापी के बाद आवेदन की तिथि से चौदहवें दिन तक रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने से भी राहत मिलेगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को इस पूरी प्रक्रिया का जिम्मा सौंपते हुए आवश्यक कर्मचारियों, तकनीकी संसाधनों और निगरानी तंत्र की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि सख्त मॉनिटरिंग और पर्याप्त संसाधनों के जरिए तय समय-सीमा का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह पहल प्रशासनिक सुधार के साथ-साथ डिजिटल गवर्नेंस को भी मजबूती देगी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भरोसा जताया है कि जमीन मापी प्रक्रिया को सरल बनाने से प्रदेशवासियों के दैनिक जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। भूमि विवादों में कमी आएगी, भरोसा बढ़ेगा और सरकारी सेवाओं को लेकर लोगों की धारणा सकारात्मक होगी। उन्होंने नागरिकों से इस नई व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी मांगे हैं, जिन्हें 25 जनवरी 2026 तक विभिन्न माध्यमों से सरकार तक पहुंचाया जा सकता है। कुल मिलाकर, यह फैसला न केवल प्रशासनिक सुधार का संकेत है, बल्कि बिहार को विकसित राज्यों की कतार में खड़ा करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।






















