बिहार में 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव (Bihar Panchayat Election 2026) को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इस बार का पंचायत चुनाव सिर्फ एक नियमित लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि तकनीक आधारित सुधारों की वजह से एक नई मिसाल बनने जा रहा है। चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने फर्जी मतदान पर सख्त प्रहार करने की रणनीति तैयार की है, जिसमें आधुनिक तकनीक को सबसे बड़ा हथियार बनाया गया है।
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने औरंगाबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि आने वाले पंचायत चुनाव में बोगस वोटिंग की पुरानी समस्या से निपटने के लिए फेशियल रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक के जरिए मतदान केंद्रों पर आने वाले मतदाताओं की पहचान कैमरों से की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति दोबारा फर्जी मतदान करने की कोशिश करता है, तो सिस्टम तुरंत उसे पहचान लेगा। मंत्री के अनुसार, इस कदम से चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा और मजबूत होगा और निष्पक्षता पर उठने वाले सवालों को काफी हद तक खत्म किया जा सकेगा।
मंत्री दीपक प्रकाश ने यह भी बताया कि 2026 का पंचायत चुनाव कई बदलावों के साथ होगा। इस बार नया आरक्षण रोस्टर लागू किया जाएगा, जिससे पंचायत स्तर पर प्रतिनिधित्व का समीकरण बदलेगा। इसके साथ ही पंचायत चुनाव ईवीएम के माध्यम से कराए जाएंगे, जो ग्रामीण लोकतंत्र में एक बड़ा तकनीकी बदलाव माना जा रहा है। खास बात यह है कि पंचायत के छह अलग-अलग पदों के लिए एक साथ मतदान होगा। इसके लिए छह अलग-अलग बैलेट यूनिट लगाई जाएंगी, जिन्हें अलग-अलग रंगों में डिजाइन किया जाएगा, ताकि मतदाता बिना भ्रम के सभी पदों पर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
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चुनाव के बाद होने वाली मतगणना प्रक्रिया को लेकर भी सरकार ने अतिरिक्त सतर्कता बरतने का फैसला किया है। मंत्री के अनुसार, मतगणना के दौरान संभावित धांधली को रोकने के लिए ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। ईवीएम से प्राप्त वोटों की मैनुअल गिनती की जाएगी, लेकिन पूरी प्रक्रिया कैमरों की निगरानी में होगी। उन्होंने कहा कि पिछले चुनावों में मतगणना को लेकर हजारों शिकायतें सामने आती थीं, जिन पर सवाल उठते थे। नई तकनीक के लागू होने से ऐसी शिकायतों में भारी कमी आने की उम्मीद है।
दीपक प्रकाश ने चुनाव के समयसीमा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि पिछला पंचायत चुनाव दिसंबर 2021 में हुआ था और जनवरी 2022 में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण कराया गया था। पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल पांच साल का होता है और उसी संवैधानिक अवधि को ध्यान में रखते हुए 2026 के अंत तक नए पंचायत चुनाव करा दिए जाएंगे। प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां समय रहते शुरू कर दी गई हैं, ताकि चुनाव प्रक्रिया सुचारू, सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से संपन्न हो सके।






















