बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Politics 2026) के नतीजों ने कांग्रेस के लिए जितनी राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कीं, उससे कहीं ज्यादा सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया. महज छह सीटों पर सिमट आई कांग्रेस को लेकर चुनाव बाद यह नैरेटिव तेजी से फैलाया गया कि पार्टी के ये विधायक टूट सकते हैं और सत्ताधारी खेमे की ओर रुख कर सकते हैं. बिहार की राजनीति में टूट और जोड़-तोड़ का इतिहास रहा है, इसलिए इन अटकलों ने तेजी से तूल पकड़ लिया. लेकिन शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को दिल्ली में हुई एक हाई-प्रोफाइल बैठक ने इन तमाम चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश की.
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास 10 राजाजी मार्ग पर हुई इस बैठक को सिर्फ संगठनात्मक समीक्षा के तौर पर नहीं, बल्कि बिहार में पार्टी की राजनीतिक मौजूदगी को दोबारा परिभाषित करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है. बैठक में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी ने संदेश को और मजबूत कर दिया कि पार्टी बिहार को हल्के में लेने के मूड में नहीं है. चुनावी झटके के बाद भी कांग्रेस नेतृत्व यह दिखाना चाहता है कि संगठन एकजुट है और भविष्य की रणनीति पर गंभीर मंथन चल रहा है.
बैठक में कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश कुमार राम, पार्टी के सभी छह विधायक और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए. खास बात यह रही कि जिन विधायकों के पार्टी छोड़ने की अटकलें सबसे ज्यादा उड़ाई जा रही थीं, वे सभी इस बैठक में मौजूद थे. इसे सियासी भाषा में एक तरह का ‘रोल कॉल’ माना जा रहा है, जिसके जरिए कांग्रेस ने साफ संकेत दिया कि फिलहाल किसी तरह की टूट की बात महज अफवाह है.
बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल का बयान बेहद सख्त और स्पष्ट था. उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी विधायक कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़े हैं और उनके पार्टी छोड़ने की खबरें पूरी तरह से आधारहीन हैं. वेणुगोपाल के शब्दों में यह सिर्फ अफवाहें नहीं, बल्कि जानबूझकर फैलाई जा रही गलत सूचनाएं हैं, जिनका मकसद कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाना है. यह बयान उस राजनीतिक मनोविज्ञान को भी दर्शाता है, जहां कमजोर नतीजों के बाद किसी भी दल को टूट की अफवाहों से जूझना पड़ता है.
इस बैठक की तस्वीर और उससे जुड़े संदेश सोशल मीडिया पर भी तेजी से साझा किए गए. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने एक्स पर बैठक की तस्वीर पोस्ट करते हुए इसे बिहार की राजनीति में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने संगठनात्मक मजबूती और जनहित के मुद्दों पर हुई चर्चा का जिक्र कर यह संकेत दिया कि कांग्रेस आने वाले समय में सिर्फ आंतरिक एकजुटता ही नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों पर भी आक्रामक रणनीति अपना सकती है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार राम का बयान भी इसी लाइन में देखा जा रहा है. उन्होंने खरगे और राहुल गांधी के नेतृत्व में हुई बैठक को बिहार कांग्रेस परिवार के लिए अहम बताया और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी को संगठन के लिए सकारात्मक संकेत करार दिया.






















