राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में संगठनात्मक बदलाव के साथ ही बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, लेकिन इस फैसले ने जहां RJD के भीतर पीढ़ी परिवर्तन का संदेश देने की कोशिश की है, वहीं विपक्ष ने इसे खुलकर परिवारवाद से जोड़ दिया है। बयानबाजी के इस दौर में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के सुर तीखे नजर आ रहे हैं।
भाजपा नेता अजय आलोक ने तेजस्वी यादव की नियुक्ति पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बिहार में एक कहावत प्रचलित है—“नरकों में ठेलम ठेल।” उनके मुताबिक RJD अब नर्क बन चुकी है और यह पूरी तरह एक पारिवारिक पार्टी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस विषय पर और कुछ कहने की जरूरत नहीं, क्योंकि परिवार की बेटी रोहिणी आचार्य ने जो कहा है, वही इस पूरी तस्वीर को बयां कर देता है। अजय आलोक का यह बयान न सिर्फ RJD पर निशाना है, बल्कि उस आंतरिक कलह की ओर भी इशारा करता है, जिसकी चर्चा लंबे समय से राजनीतिक गलियारों में होती रही है।
दूसरी ओर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने अपेक्षाकृत संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने तेजस्वी यादव को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव ने अगली पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपकर एक अच्छा काम किया है। उपेंद्र कुशवाहा का यह बयान इस बात का संकेत देता है कि विपक्ष के भीतर भी इस नियुक्ति को सिर्फ परिवारवाद के चश्मे से देखने के बजाय नेतृत्व हस्तांतरण की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
वहीँ जन शक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने कहा कि जब जिम्मेदारी मिली है तो तेजस्वी यादव को उसका पूरी निष्ठा से निर्वहन करना चाहिए। यह बयान पार्टी के अंदर नेतृत्व को लेकर अपेक्षाओं और दबाव दोनों को दर्शाता है। साफ है कि संगठन के भीतर अब तेजस्वी यादव की भूमिका सिर्फ नेता प्रतिपक्ष तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को दिशा देने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर होगी।
रोहिणी आचार्य के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए तेज प्रताप यादव ने यह भी कहा कि उन्होंने जो कहा है, वह शत-प्रतिशत सही है। यह टिप्पणी RJD के अंदर चल रही पारिवारिक और वैचारिक खींचतान को उजागर करती है। रोहिणी आचार्य का बयान पहले ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन चुका है और अब उस पर पार्टी के भीतर से समर्थन मिलना, आने वाले समय में RJD की आंतरिक राजनीति को और दिलचस्प बना सकता है।






















