कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. शकील अहमद (Shakil Ahmed Controversy) के पटना स्थित आवास पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर न सिर्फ गंभीर आरोप लगाए हैं, बल्कि अपने आवास पर संभावित हमले की आशंका भी जताई है। मामला सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के भीतर असहमति, नेतृत्व की शैली और भविष्य की राजनीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

डॉ. शकील अहमद बिहार की राजनीति में एक लंबा अनुभव रखते हैं। वे तीन बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद से वे लगातार पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी को लेकर खुलकर बयान दे रहे हैं। हालिया बयानबाजी ने राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है।
डॉ. शकील अहमद का आरोप है कि कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व 27 जनवरी को ‘पुतला दहन’ के बहाने उनके पटना और मधुबनी स्थित आवास पर हमला कराने की साजिश रच रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया और कहा कि असहमति रखने वालों को डराने की कोशिश की जा रही है। अपने दावे को मजबूती देने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी पोस्ट साझा की है, जिससे मामला और ज्यादा सार्वजनिक हो गया है।
इस विवाद की जड़ राहुल गांधी को लेकर दिए गए उनके बयान माने जा रहे हैं। शकील अहमद ने राहुल गांधी को डरपोक और असुरक्षित नेता बताया और आरोप लगाया कि पार्टी में उन्हीं युवा नेताओं को आगे बढ़ाया जा रहा है जो नेतृत्व की तारीफ करते हैं। उन्होंने अमेठी सीट पर राहुल गांधी की हार का जिक्र करते हुए कहा कि जिस सीट को परिवार और पूर्वजों ने दशकों तक सींचा, वह नेतृत्व के रवैए की वजह से हाथ से निकल गई।
कांग्रेस की ओर से फिलहाल शकील अहमद के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथोंहाथ ले लिया है। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कहा कि यह मामला कांग्रेस की ‘इमरजेंसी वाली सोच’ को उजागर करता है, जहां असहमति बर्दाश्त नहीं की जाती। उनके मुताबिक, अगर शकील अहमद के आरोप सही हैं तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यह दिखाता है कि पार्टी की शीर्ष लीडरशिप आलोचना से डरती है।






















