बिहार की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के भीतर उठे बयान विवाद ने नई बहस को जन्म दे दिया है। पूर्व कांग्रेसी नेता शकील अहमद के बयान (Shakil Ahmed Statement) के बाद पार्टी के अंदर जिस तरह का विरोध देखने को मिला, उसने कांग्रेस की आंतरिक कार्यशैली और नेतृत्व संस्कृति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर बिहार सरकार के कई मंत्रियों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जिन्होंने इसे केवल एक बयान तक सीमित न मानते हुए कांग्रेस के इतिहास और उसके संगठनात्मक ढांचे से जोड़कर देखा है।
बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने शकील अहमद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व पर पहले से ही प्रश्नचिह्न लगा हुआ है, ऐसे में इस तरह की घटनाओं का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राज्य में कानून का राज है और अगर कोई भी आपराधिक घटना होती है तो दोषी बच नहीं पाएगा। जायसवाल के इस बयान को कांग्रेस की ओर से जारी धमकी और पुतला दहन जैसे कदमों पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं, पूर्व कांग्रेस नेता शकील अहमद के समर्थन में बिहार सरकार के मंत्री मंगल पांडे खुलकर सामने आए। उन्होंने कांग्रेस को अलोकतांत्रिक पार्टी बताते हुए कहा कि यह संगठन आज भी राजा-महाराजाओं की तरह चलाया जाता है। उनके अनुसार सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के इर्द-गिर्द ही पूरी पार्टी सिमट कर रह गई है और संगठन केवल उनके हाथ की कठपुतली बनकर काम कर रहा है। मंगल पांडे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में कोई भी व्यक्ति खुलकर सच बोलने की हिम्मत नहीं कर सकता और जो ऐसा करता है, उसके खिलाफ वैसी ही कार्रवाई होती है जैसी आज शकील अहमद के मामले में देखने को मिल रही है। उन्होंने इसे कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास की पुनरावृत्ति बताया, जहां असहमति की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया जाता रहा है।
दरअसल, शकील अहमद द्वारा कांग्रेस नेतृत्व, विशेष रूप से राहुल गांधी पर दिए गए बयान के बाद पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया। कांग्रेस की ओर से न सिर्फ उन्हें धमकाने के आरोप लगे, बल्कि सभी जिलों में पुतला दहन के लिए नोटिस जारी किए गए। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कांग्रेस असहमति को स्वीकार करने के लिए तैयार है या नहीं।
इस बीच बिहार सरकार के एक और मंत्री संजय कुमार सिंह ने भी शकील अहमद खान के समर्थन में बयान देकर चर्चा को और तेज कर दिया। उन्होंने कहा कि शकील अहमद खान एक वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी के अंदर की परिस्थितियों को लेकर उनकी अपनी समझ हो सकती है। मंत्री संजय कुमार सिंह ने किसी वरिष्ठ नेता के खिलाफ फरमान जारी करने या पुतला दहन जैसे कदमों को अनुचित बताया और इसे राजनीतिक असहिष्णुता का उदाहरण करार दिया।
संजय कुमार सिंह ने इसी दौरान यूजीसी कमेटी के नए प्रावधानों को लेकर भी सरकार के रुख पर बात की। उन्होंने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी से जुड़े प्रावधानों को लेकर देशभर में जो विरोध हो रहा है, सरकार उस पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी कई नियम विरोध के बाद बदले गए हैं और संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर इस मामले में भी संशोधन किया जा सकता है।






















