UGC New Rules 2026: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच अब यह सवाल राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है कि आखिर इन नियमों की सिफारिश किसने की थी और उस समिति में कौन-कौन लोग शामिल थे। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन UGC नियमों को लेकर एक वर्ग खासतौर पर सवर्ण समाज में नाराजगी दिखाई दे रही है, उनकी सिफारिश संसद की जिस स्थायी समिति ने की थी, उसके अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हैं। इस समिति में कुल 30 सदस्य थे, जिनमें आधे से अधिक सत्ताधारी भाजपा से जुड़े सांसद शामिल थे।
UGC द्वारा हाल ही में जारी अधिसूचना के अनुसार अब सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में एक इक्विटी कमेटी का गठन अनिवार्य होगा। यह कमेटी SC, ST, OBC वर्ग के छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई करेगी और तय समय सीमा में उनका समाधान करेगी। इस नियम को सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, लेकिन इसे लेकर यह आरोप भी लग रहे हैं कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शैक्षणिक स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।
दरअसल यह सिफारिश संसद की स्थायी समिति ऑन एजुकेशन, वूमन, चिल्ड्रन, यूथ एंड स्पोर्ट्स द्वारा की गई थी। इस समिति की अध्यक्षता दिग्विजय सिंह कर रहे हैं और इसमें लोकसभा के 21 तथा राज्यसभा के 9 सदस्य शामिल थे। दलगत प्रतिनिधित्व पर नजर डालें तो समिति में भाजपा के 16, कांग्रेस के 4, समाजवादी पार्टी के 3, तृणमूल कांग्रेस के 2, सीपीएम के 1, डीएमके के 1, एनसीपी (अजीत गुट) के 1, एनसीपी (शरद गुट) के 1 और आम आदमी पार्टी की 1 पूर्व सदस्य थीं। इस तरह यह स्पष्ट होता है कि समिति में सत्ताधारी भाजपा के सांसदों की संख्या पचास प्रतिशत से भी अधिक थी।
राज्यसभा से इस समिति में दिग्विजय सिंह के अलावा बिहार से भाजपा सांसद भीम सिंह, पश्चिम बंगाल से सीपीएम सांसद बिकास रंजन भट्टाचार्य, राजस्थान से भाजपा सांसद घनश्याम तिवाड़ी, हरियाणा से भाजपा सांसद और राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेखा शर्मा, केरल से भाजपा सांसद सी. सदानंदन मास्टर, हिमाचल प्रदेश से भाजपा सांसद सिकंदर कुमार, महाराष्ट्र से एनसीपी (अजीत गुट) की सांसद सुनेत्रा पवार और दिल्ली से आम आदमी पार्टी की पूर्व सांसद स्वाती मालीवाल शामिल थीं।
लोकसभा से इस समिति में कई चर्चित चेहरे भी रहे हैं। इनमें कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज और भाजपा सांसद अभिजित गंगोपाध्याय, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से सांसद रविशंकर प्रसाद, भाजपा प्रवक्ता और पुरी से सांसद संबित पात्रा, नई दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज, छत्तीसगढ़ से सांसद बृजमोहन अग्रवाल, आंध्र प्रदेश से सांसद दग्गुबाती पूरनदेश्वरी और मध्य प्रदेश से सांसद दर्शन सिंह चौधरी जैसे नाम शामिल हैं।
इसके अलावा समिति में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के सांसद भी थे। कांग्रेस से डीएन कुरियाकोसे और वर्षा गायकवाड़, समाजवादी पार्टी से जितेंद्र कुमार दोहरे, जियाउर्रहमान बर्क और राजीव राय, तृणमूल कांग्रेस से कालिपाड़ा सरेन खेरवाल और रचना बनर्जी, भाजपा से हेमांग जोशी, कामाख्या प्रसाद तासा, करण भूषण सिंह और शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया, जबकि डीएमके से टी. सुमथि उर्फ थमिझाची थंगापांडियन इस समिति का हिस्सा रहीं।




















