केंद्रीय बजट (Budget 2026) पेश होते ही देश की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी 2026 को संसद में बजट पेश करते हुए सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं और भविष्य की योजनाओं का खाका रखा, लेकिन आम आदमी, बेरोजगार युवाओं और राज्यों से जुड़ी अपेक्षाओं पर यह बजट कितना खरा उतरा, इस पर सवाल उठने लगे हैं। सत्ता पक्ष जहां इसे विकासोन्मुखी और दूरदर्शी बजट बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे जमीनी हकीकत से कटा हुआ करार दे रहा है।
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इसी कड़ी में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी और राजद की नेता रोहिणी आचार्य ने बजट 2026 को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस बजट को पुराने विचारों को नए कवर में पेश करने जैसा बताते हुए कहा कि इसमें न तो आम लोगों की आय बढ़ाने की ठोस रणनीति दिखती है और न ही देश के सबसे बड़े संकट बेरोजगारी को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप नजर आता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में रोहिणी आचार्य ने सवाल उठाया कि अगर अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है, तो प्रति व्यक्ति आय में वास्तविक बढ़ोतरी कैसे होगी, इस पर बजट पूरी तरह खामोश क्यों है।
रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि बजट में डिजिटल कंटेंट क्रिएशन को बढ़ावा देने की बात जरूर की गई है, लेकिन देश की विशाल शिक्षित और गैर-शिक्षित युवा आबादी के लिए स्थायी और बड़े पैमाने पर रोजगार कैसे सृजित होंगे, यह अब भी स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि जॉब क्रिएशन जैसे गंभीर मुद्दे पर केवल घोषणाएं काफी नहीं हैं, बल्कि सेक्टरवार स्पष्ट योजना और समयबद्ध कार्ययोजना की जरूरत है, जो इस बजट में नदारद दिखती है।
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बिहार के संदर्भ में रोहिणी आचार्य ने बजट को और भी निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ की मार झेलने वाले बिहार के लिए बाढ़ प्रबंधन, बाढ़ की रोकथाम, बाढ़ के बाद पुनर्वास और सिंचाई संसाधनों के विकास को लेकर विशेष पैकेज की मांग कोई नई नहीं है। इसके बावजूद बजट 2026 में इस दिशा में कोई ठोस बजटीय प्रावधान नहीं किया गया, जो राज्य की जनता की अनदेखी को दर्शाता है।






















