Bihar Budget 2026-27: पटना से पेश किए गए बिहार बजट 2026-27 ने राज्य की आर्थिक दिशा और सामाजिक प्राथमिकताओं को एक नई परिभाषा देने की कोशिश की है। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने विधानसभा में 3.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट प्रस्तुत करते हुए साफ संकेत दिया कि सरकार का फोकस अब सिर्फ बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन जैसे सामाजिक क्षेत्रों को आर्थिक विकास से जोड़ने पर है। यह बजट ऐसे समय आया है जब बिहार तेज आर्थिक वृद्धि वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हो चुका है और सरकार “सात निश्चय-3” के जरिए दीर्घकालिक विकास मॉडल को आगे बढ़ाना चाहती है।
बजट भाषण में सबसे अहम संदेश यह रहा कि शिक्षा को राज्य की विकास नीति का आधार बनाया गया है। स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए रिकॉर्ड 68,216.95 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का दावा है कि यह निवेश न केवल बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करेगा बल्कि डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लासरूम और उच्च तकनीकी संस्थानों की स्थापना को गति देगा। यह संकेत देता है कि बिहार अब जनसंख्या को बोझ नहीं बल्कि मानव संसाधन में बदलने की रणनीति पर काम कर रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र को दूसरा बड़ा लाभार्थी बनाया गया है। 21,270.40 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी स्तर तक ले जाने और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अनुसार, यह निवेश भविष्य में इलाज के लिए बाहर जाने की मजबूरी को कम करेगा और राज्य के भीतर ही उन्नत चिकित्सा ढांचा विकसित करेगा।
ग्रामीण विकास और कृषि को लेकर बजट का रुख स्पष्ट रूप से किसान-केंद्रित दिखा। ग्रामीण विकास विभाग के लिए 23,701.18 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को सालाना 3,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और एग्री-स्टार्टअप को बढ़ावा देने की घोषणा यह दर्शाती है कि सरकार खेती को केवल परंपरागत पेशा नहीं बल्कि उद्यम के रूप में स्थापित करना चाहती है। हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने का लक्ष्य भी इसी सोच का हिस्सा है।
महिला सशक्तिकरण इस बजट की प्रमुख सामाजिक धुरी बनकर उभरा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 1.56 करोड़ से अधिक महिलाओं को पहले ही 10,000 रुपये की सहायता दी जा चुकी है और अब उनके व्यवसाय विस्तार के लिए 2 लाख रुपये तक अतिरिक्त सहायता या ऋण का प्रावधान किया गया है। जीविका मॉडल को रोजगार का मजबूत आधार बताते हुए सरकार ने यह संकेत दिया कि महिला भागीदारी के बिना आर्थिक विकास अधूरा है।
अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए अलग मद में बजट प्रावधान सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अनुसूचित जाति के लिए 19,603 करोड़ और अनुसूचित जनजाति के लिए 1,648 करोड़ रुपये का आवंटन सीधे लक्षित योजनाओं पर खर्च होगा, जिससे लाभार्थियों तक सीधी पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
रोजगार और निवेश को लेकर सरकार ने आक्रामक लक्ष्य तय किए हैं। 2025 से 2030 के बीच एक करोड़ रोजगार सृजन और 50 लाख करोड़ रुपये के निजी निवेश को आकर्षित करने की योजना पेश की गई है। हर प्रखंड में मॉडल स्कूल और डिग्री कॉलेज की स्थापना, स्किल डेवलपमेंट और युवा प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर जोर यह दर्शाता है कि सरकार शिक्षा और उद्योग के बीच सीधा संबंध बनाना चाहती है।
ऊर्जा, सड़क और शहरी विकास के क्षेत्र में भी बजट में बड़ी योजनाएं शामिल हैं। प्रति व्यक्ति बिजली खपत बढ़कर 374 यूनिट तक पहुंचना सरकार की उपलब्धि के रूप में पेश किया गया। सौर और नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, ग्रामीण सड़कों का नेटवर्क और शहरी गरीबों के लिए सस्ते आवास इस बजट के शहरी-ग्रामीण संतुलन को दर्शाते हैं।
बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है। गंगा जल आपूर्ति योजना के विस्तार, नदी जोड़ परियोजनाओं और बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट्स को गति देने की योजना से यह संकेत मिलता है कि सरकार आपदा प्रबंधन को भी विकास नीति का हिस्सा मान रही है।
राजस्व और वित्तीय स्थिति की बात करें तो कुल राजस्व प्राप्ति 2,85,277 करोड़ रुपये अनुमानित की गई है। राज्य के अपने कर से 65,800 करोड़ और केंद्र से सहायता व अनुदान के रूप में 1,58,178 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। वित्त मंत्री ने इसे बिहार की मजबूत होती अर्थव्यवस्था का संकेत बताया और कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में बिहार तेजी से आगे बढ़ रहा है।






















