राज्य बजट पेश होते ही बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मंगलवार शाम नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की अध्यक्षता में महागठबंधन विधायक दल की अहम बैठक हुई, जिसने आने वाले विधानसभा सत्र के संकेत साफ कर दिए। यह बैठक 10 सर्कुलर रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर आयोजित की गई, जहां महागठबंधन के विधायक और विधान पार्षद बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
सूत्रों के अनुसार बैठक का केंद्र बिंदु नीतीश सरकार द्वारा पेश किए गए बजट की गहन समीक्षा रहा। बजट के प्रावधानों, प्राथमिकताओं और संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही इस बात पर भी मंथन हुआ कि विधानसभा के भीतर किस तरह सरकार को जनहित के मुद्दों पर कठघरे में खड़ा किया जाए। महागठबंधन ने स्पष्ट संकेत दिए कि बजट को लेकर सरकार की कथनी और करनी के अंतर को सदन में प्रमुखता से उठाया जाएगा।

बैठक में शामिल विधायक संदीप सौरभ ने बजट को आंकड़ों की बाजीगरी बताते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महज 12 मिनट में समाप्त हुए बजट भाषण ने सरकार की दिशा और नीयत दोनों को उजागर कर दिया है। उनके अनुसार बजट में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसे जनसरोकारों को लेकर कोई ठोस रोडमैप नजर नहीं आता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महागठबंधन विधानसभा सत्र के दौरान जनता से जुड़े हर सवाल पर एकजुट होकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम करेगा।
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राजद के वरिष्ठ नेता भाई वीरेंद्र ने संख्या के सवाल को लेकर सरकार समर्थकों के तर्कों पर पलटवार किया। उन्होंने 2010 का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी राजद के विधायकों की संख्या कम थी, इसके बावजूद सरकार के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई गई थी। उन्होंने कहा कि संख्या से नहीं, मुद्दों से लड़ाई लड़ी जाती है और इस बार भी सरकार को हर सवाल का जवाब देना पड़ेगा।
वहीं, राज्य सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुके राजद विधायक प्रोफेसर चंद्रशेखर सिंह ने बैठक को रूटीन प्रक्रिया बताया, लेकिन साथ ही बजट की उपयोगिता पर सवाल भी खड़े किए। उनका कहना था कि हर सत्र से पहले ऐसी बैठकें होती हैं, लेकिन इस बार जो बजट आया है, उससे बिहार को कोई ठोस और दीर्घकालिक लाभ मिलता हुआ नहीं दिख रहा।






















