बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान राजनीति का तापमान उस वक्त अचानक बढ़ गया जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav Attack) ने नीतीश कुमार सरकार पर तीखे शब्दों में हमला बोला। अपने भाषण में उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और हालिया घटनाओं को लेकर सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। खासतौर पर नीट छात्रा हत्याकांड को लेकर उन्होंने राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया और आरोप लगाया कि सरकार संवेदनशील मामलों को गंभीरता से नहीं ले रही है।
सत्र की शुरुआत में तेजस्वी यादव ने अपने पैर में चोट का हवाला देते हुए विधानसभा अध्यक्ष से बैठकर भाषण देने की अनुमति मांगी। उन्होंने बताया कि उनका नाखून उखड़ गया है और दवा लेने के कारण खड़े होकर बोलना संभव नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने उनके अनुरोध को स्वीकार किया, जिसके बाद उन्होंने बैठकर अपना भाषण पढ़ना शुरू किया। हालांकि पूरे संबोधन के दौरान वे कई बार अटकते और थोड़ा असहज नजर आए, लेकिन उनके राजनीतिक हमलों की धार कम नहीं हुई।

भाषण के दौरान तेजस्वी यादव ने शायरी का सहारा लेकर सरकार पर तंज कसा और कहा कि “आइना जब भी उठाया करो, पहले खुद देखा करो फिर दिखाया करो।” इसके बाद उन्होंने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि “थाना खामोश है, प्रशासन बेहोश है और सरकार पूरी तरह मदहोश है।” उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार हर गंभीर मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश करती है और बिहार सरकार एक तरह से “कोल्ड स्टोरेज” बन गई है।
नीट छात्रा हत्याकांड का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि इस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े करती हैं और सरकार को जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के बीच सरकार को लेकर आक्रोश और निराशा बढ़ रही है। उनके आरोपों के दौरान सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विरोध भी किया, जिससे सदन में कई बार शोर-शराबा हुआ।
इस बीच तेजस्वी यादव के एक बयान को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। महिलाओं को लेकर दिए गए उनके कथन पर विधानसभा में हंगामा मच गया। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार महिलाओं के सम्मान की बात करती है, लेकिन दूसरे राज्यों के नेताओं द्वारा बिहार की महिलाओं पर अपमानजनक टिप्पणियां की जाती हैं। हालांकि उनके बयान को लेकर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और इसे महिलाओं के सम्मान से जोड़कर विवाद खड़ा हो गया।






















