देश की संसद में एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप ने माहौल गर्म कर दिया है। झारखंड के गोड्डा से भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Nishikant Dubey vs Rahul Gandhi) पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘अर्बन नक्सल’ करार दिया। दुबे के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है, वहीं संसद के भीतर हाल के घटनाक्रम ने संसदीय मर्यादा और सुरक्षा व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।
रविवार को दिए गए अपने बयान में निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ साजिश रच रहा था। उन्होंने कहा कि संसद में अलग-अलग विचार होना लोकतंत्र की पहचान है, लेकिन जिस तरह का हंगामा हाल के दिनों में देखा गया, वह उनके संसदीय अनुभव में अभूतपूर्व है। दुबे ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में तथ्यों और संदर्भों के साथ चर्चा होनी चाहिए, न कि किसी अप्रकाशित पुस्तक या अधूरी जानकारी के आधार पर राजनीतिक बयान दिए जाने चाहिए।
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यह विवाद उस समय और तेज हो गया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के एक बयान का हवाला दिया जाने लगा। बिरला ने बताया था कि उन्होंने एक दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में उपस्थित न होने की सलाह दी थी, क्योंकि उन्हें ऐसी सूचना मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट के आसपास जाकर अप्रिय स्थिति पैदा कर सकते हैं। अध्यक्ष के इस बयान ने संसद की सुरक्षा और राजनीतिक तनाव के स्तर को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
निशिकांत दुबे ने कहा कि देश ने उस दिन सदन में जो दृश्य देखा, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए चिंताजनक था। उनके अनुसार कुछ सांसद प्रधानमंत्री की सीट तक पहुंच गए थे और स्थिति असामान्य हो सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय गरिमा बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है और राजनीतिक असहमति को व्यवस्थित तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए।


















