बिहार विधान परिषद (Bihar Vidhan Parishad) की कार्यवाही उस वक्त अचानक तीखी हो गई जब विपक्षी दलों के विधान पार्षदों ने लगातार नारेबाजी और शोरगुल शुरू कर दिया। सदन का माहौल बिगड़ता देख नेता सदन और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सीट से खड़े हुए और विपक्ष के रवैये पर कड़ा एतराज जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन चर्चा और जनहित के मुद्दों के लिए होता है, लेकिन विपक्ष इसे बार-बार बाधित कर रहा है। उनके मुताबिक, विरोध की राजनीति में मुद्दों और तथ्यों की जगह शोर ने ले ली है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

नीतीश कुमार ने विपक्षी सदस्यों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद उन्होंने महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार के लिए ठोस काम नहीं किया, जबकि मौजूदा सरकार ने महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए संस्थागत कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सदन में हंगामा करने वालों को विकास के वास्तविक कामों की समझ नहीं है और वे चर्चा से बचते हुए माहौल बिगाड़ने में लगे रहते हैं। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे उपलब्धियों पर बहस करने के बजाय निजी टिप्पणियों और अवरोध की राजनीति को तरजीह दे रहे हैं।
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मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि बीते वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में व्यापक बदलाव किए गए हैं। उनके अनुसार, सरकार की नीति का केंद्र “सबका साथ, सबका विकास” रहा है और इसी सोच के तहत योजनाओं का विस्तार हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अनुशासन तोड़ने और सदन की मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाले व्यवहार पर कार्रवाई की जरूरत है, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनी रहे।






















