बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) के बजट सत्र का छठा दिन भी सियासी टकराव की भेंट चढ़ गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने कानून-व्यवस्था और महिला उत्पीड़न के मामलों को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोल दिया। हंगामे के बीच कार्यवाही बाधित हुई और कुछ देर के लिए सदन का माहौल पूरी तरह गर्माता नजर आया। विपक्षी दलों का कहना था कि राज्य में अपराध और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते मामलों पर औपचारिक बहस कराई जाए, ताकि सरकार से जवाबदेही तय हो सके।
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माले विधायक संदीप सौरभ ने विपक्ष की ओर से कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश करने की बात कही और दावा किया कि सभी विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट हैं। हंगामे के तेज होते ही विधानसभा अध्यक्ष को मार्शल बुलाने पड़े और पोस्टर हटाने के निर्देश दिए गए। अध्यक्ष ने सदस्यों से अपील की कि वे तय प्रक्रिया का पालन करें और शून्यकाल के दौरान अपनी बात रखें। अध्यक्ष की यह टिप्पणी दरअसल संसदीय मर्यादा की याद दिलाने वाली थी, ताकि बहस और विरोध दोनों लोकतांत्रिक दायरे में रह सकें। हालांकि विपक्ष का रुख आक्रामक बना रहा और नारेबाजी से कार्यवाही में व्यवधान आता रहा।

इधर संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि मुख्यमंत्री से जवाब मांगना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन इसके लिए सदन की नियमावली और प्रक्रिया का पालन जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार सवालों से बच नहीं रही है और हर मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार है। विजय चौधरी ने विपक्ष पर यह आरोप भी लगाया कि वे खुद असमंजस की स्थिति में हैं, कभी चर्चा की मांग करते हैं तो कभी अचानक वॉकआउट कर देते हैं। उनके अनुसार, बैठकर चर्चा करने की सहमति बनने के बाद अचानक सदन छोड़ देना विपक्ष की रणनीति पर सवाल खड़े करता है।





















