बिहार विधान परिषद (Bihar Vidhan Parishad) की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजनीति गरमा गई। पोर्तिको में राजद एमएलसी के प्रदर्शन ने संकेत दे दिया कि सदन के भीतर आज बहस नहीं, टकराव हावी रहने वाला है। विपक्ष ने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और सत्ता पक्ष पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। इस माहौल में राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के बयान ने सियासी बहस को और धार दे दी, जिसने सत्र की कार्यवाही से बाहर निकलकर पूरे बिहार की राजनीति में हलचल पैदा कर दी।
अब्दुल बारी सिद्दीकी ने विधान परिषद में पिछले दिन हुए घटनाक्रम को लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए चिंता का विषय बताया। उनके मुताबिक सदन में विपक्ष के नेता के साथ हुआ व्यवहार संसदीय शिष्टाचार के दायरे में नहीं आता। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि हालिया घटनाएं सत्ता के रवैये में असहजता को दिखाती हैं। सिद्दीकी का दावा रहा कि कभी डॉक्टर का नकाब खींचने जैसी घटनाएं हों या सदन में टोपी उतरवाने की बात, इन प्रसंगों से सरकार की संवेदनशीलता और संयम पर प्रश्नचिह्न लगता है। इस टिप्पणी के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया।
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बता दें कि बिहार विधान परिषद की कार्यवाही में सोमवार को काफी हंगामा हुआ। विपक्ष वेल में आकर महिलाओं के साथ हो रहे अपराध पर चर्चा कराने की मांग पर अड़ रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विरोधी दल राबड़ी देवी के बीच काफी नोकझोंक हुई। राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री के लिए कहा-होश में आइए। चुप रहिए। बैठिए। डुबा दिए। शर्म कीजिए। इस्तीफा दीजिए। नीतीश कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को लड़की कहा। बोले- ये जो लड़की है, इसका क्या है? इसको कुछ आता है? ई कोई काम की है? मुख्यमंत्री ने सभापति से विपक्षी सदस्यों पर एक्शन लेने की मांग तक कर डाली।






















