बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे पर सदन में जोरदार बहस छिड़ गई। विधायकों ने सरकार से इन कर्मचारियों के वेतन, कार्य अवधि और सेवा शर्तों को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा।सदन में कई सदस्यों ने आरोप लगाया कि सचिवालय और विभिन्न जिलों में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए अलग-अलग नियम लागू किए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर वेतन और भत्तों में भेदभाव हो रहा है, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष फैल रहा है।
विधायकों ने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू नहीं हो रहा, और कई कर्मचारी न्यूनतम वेतनमान से भी कम पा रहे हैं। साथ ही, कार्य अवधि को लेकर भी शिकायतें उठीं कि कुछ मामलों में केवल 26 दिनों का ही मानदेय दिया जा रहा है, जबकि पूरे महीने काम लिया जाता है।
विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त हजारों कर्मचारी लंबे समय से अनिश्चितता और असमानता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि इन कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि, नियमितीकरण और एकसमान नीति लागू की जाए। इस मुद्दे पर बहस के दौरान सदन में हंगामा भी देखने को मिला, और कई विधायकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।सरकार की ओर से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब देने की उम्मीद है, हालांकि आज के सत्र में प्रारंभिक चर्चा में ही यह विषय गरमाया रहा। बिहार में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की संख्या काफी बड़ी है, और यह मुद्दा बजट सत्र के दौरान राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है। विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ एक प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।






















