बिहार विधान मंडल के बजट सत्र (Bihar Budget Session) का 13वां दिन राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि आज दोनों सदनों में कई संवेदनशील और चर्चित मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ सकते हैं। शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग एक बार फिर केंद्र में है, जिससे सदन में हंगामे के आसार जताए जा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से इस मुद्दे पर चल रही बहस के बीच आज का दिन राजनीतिक बयानबाजी और रणनीतिक टकराव का गवाह बन सकता है।
आज विधानसभा में विभिन्न विभागों से जुड़े ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर सरकार की ओर से जवाब दिया जाएगा, जिसमें सूचना प्रावैधिकी विभाग, योजना एवं विकास विभाग और विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग प्रमुख रूप से शामिल हैं। आलोक मेहता और भाई विरेन्द्र सहित कई विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विभागीय वक्तव्य से यह संकेत मिलता है कि सरकार प्रशासनिक कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश करेगी। वहीं प्रमोद कुमार, सचीन्द्र प्रसाद सिंह समेत 28 विधायकों के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर योजना एवं विकास विभाग की प्रतिक्रिया से विकास योजनाओं की दिशा और गति पर नई बहस छिड़ सकती है।
सत्र के दूसरे हिस्से में शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा, अल्पसंख्यक कल्याण, लघु जल संसाधन और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभागों से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है। यह बहस राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे से जुड़े मुद्दों को प्रभावित करती है, इसलिए विपक्ष सरकार की नीतियों और बजट आवंटन पर तीखे सवाल उठा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र पर होने वाली चर्चा आगामी चुनावी राजनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।
बिहार विधान परिषद में भी आज कई अहम कार्यसूचियां तय हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट सदन में रखी जाएगी, जिससे राज्य की पर्यावरणीय चुनौतियों और प्रदूषण नियंत्रण रणनीतियों पर चर्चा तेज होने की संभावना है। इसके अलावा एमएलसी जीवन कुमार सार्वजनिक परिवहन सुविधा को बेहतर बनाने के लिए गांधी मैदान पटना से दुर्गा मंदिर होते हुए परेव कोइलवर पुल तक नगर बस सेवा शुरू करने की मांग रखेंगे। वहीं मो. सोहैब मुजफ्फरपुर के काजी मोहम्मदपुर गांव के स्वर्गीय शेख रहमतुल्लाह को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देने का मुद्दा उठाकर सरकार का ध्यान आकर्षित करेंगे।
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बुधवार को हुए घटनाक्रम ने पहले ही सदन का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया था। शराबबंदी को लेकर एक मंत्री के बयान कि “सदन के सभी सदस्य शराब पीते हैं” पर विवाद खड़ा हो गया था, जिस पर दूसरे मंत्री विजय चौधरी ने तीखी आपत्ति जताते हुए इसे गलत बताया। इसी दौरान मंत्री अशोक चौधरी के भाषण के वक्त विपक्षी विधायकों ने वॉकआउट कर दिया था, जिससे सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव साफ दिखाई दिया। ग्रामीण कार्य विभाग के बजट प्रस्ताव पर भी विपक्ष ने विरोध जताया था, जिसके बाद दिए गए मंत्री के बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया। AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।






















