देशभर में राज्यसभा (Rajya Sabha Election Bihar) की 37 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों के बीच रणनीतिक हलचल तेज हो गई है। बिहार में पांच सीटों के खाली होने से यहां की राजनीति अचानक सक्रिय हो गई है और विभिन्न दल अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के विधायक अख्तरुल ईमान शाहीन का बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, जिसने संभावित गठबंधन और समर्थन की राजनीति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिहार विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने पहुंचे अख्तरुल ईमान से जब पत्रकारों ने पूछा कि राज्यसभा चुनाव में AIMIM किस गठबंधन को समर्थन देगी, तो उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि क्या उनकी पार्टी केवल समर्थन देने के लिए बनी है। उनका यह बयान सीधे तौर पर उन अटकलों को चुनौती देता दिखा, जिनमें AIMIM को किसी बड़े गठबंधन का संभावित सहयोगी माना जा रहा था। उन्होंने उल्टा सवाल करते हुए कहा कि यह पूछा जाना चाहिए कि AIMIM को कौन समर्थन देगा, क्योंकि अन्य दलों के पास राज्यसभा में प्रतिनिधित्व है जबकि उनकी पार्टी की अभी तक एक भी सीट नहीं है।
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अख्तरुल ईमान ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनकी पार्टी उन ताकतों के खिलाफ खड़ी है जिन्हें वह फिरकापरस्त बताते हैं और जो दलितों तथा दबे-कुचले वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना चाहते हैं, उन्हें AIMIM के साथ आना चाहिए। उन्होंने पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि वे लगातार समाज के वंचित वर्गों की आवाज उठा रहे हैं और सांप्रदायिकता से जुड़े मुद्दों पर सबसे पहले खड़े होते हैं। बिहार में पार्टी सीमित सीटों के बावजूद अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रही है और राज्यसभा चुनाव उसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व हासिल करने का अवसर बन सकता है।






















