बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) में आज राजनीतिक माहौल उस वक्त और गरमा गया जब राजद विधायक राहुल कुमार ने इस्लामपुर क्षेत्र में गैर मजरूआ जमीन पर कथित कब्जे का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि सत्ता के भीतर ही ऐसे लोग हैं जो नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। इस टिप्पणी पर उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने तीखे अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि “अंगद का पैर कोई नहीं खींच सकता” और उनकी कार्यशैली भले ही कड़वी लगे, लेकिन उसका असर जरूर होता है। सदन में हुई इस नोकझोंक ने राजनीतिक संदेशों और संकेतों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
विधानसभा के शून्यकाल में उठे इस मुद्दे ने न केवल भूमि विवाद को केंद्र में ला दिया बल्कि राज्य की सामाजिक और जातीय राजनीति को भी फिर से चर्चा में ला दिया। राहुल कुमार ने कहा कि इस्लामपुर में गैर मजरूआ जमीन पर कब्जा प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है और सरकार को इस पर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के अंदर ही कुछ तत्व निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक संकेतों के तौर पर भी देखा जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में भूमि और सामाजिक पहचान से जुड़े मुद्दे बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार जमीन विवादों पर गंभीर है और किसी भी प्रकार की अवैध कब्जेदारी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अपने बयान में कहा कि उनकी कार्यशैली सख्त हो सकती है, लेकिन उद्देश्य प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उनके “मेरी दवा कड़वी होती है, लेकिन असर होता है” वाले बयान को राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार विवादास्पद मुद्दों पर भी पीछे हटने के मूड में नहीं है।
इसी दौरान राजस्व और भूमि सुधार विभाग से जुड़ा एक और अहम मुद्दा सदन में उठा, जिसने बहस को और व्यापक बना दिया। अतरी विधायक रोमित कुमार ने कहा कि 1931 की जनगणना में भूमिहार ब्राह्मण की आबादी लगभग 9 लाख दर्ज थी, लेकिन 2013 की जातीय आधारित गणना की सूची में इस जाति का उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने इसे सामाजिक पहचान और प्रतिनिधित्व से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए स्पष्टीकरण की मांग की। इस पर मंत्री विजय सिन्हा ने स्पष्ट किया कि विभागीय अभिलेखों में पहले की तरह “भूमिहार ब्राह्मण” नाम ही दर्ज रहेगा और इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।






















