बिहार के धान उत्पादक किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है। राज्य सरकार के विशेष आग्रह पर केंद्र ने धान अधिप्राप्ति (Bihar Paddy Procurement) की अंतिम तिथि 28 फरवरी से बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बड़ी संख्या में किसान अब भी अपनी फसल की बिक्री की प्रतीक्षा कर रहे थे। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार की प्राथमिकता है कि हर किसान को उसकी उपज का वाजिब दाम मिले और कोई भी किसान बिचौलियों के दबाव में कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर न हो।
राज्य सरकार की पहल का असर दिल्ली में भी दिखा। 16 फरवरी को नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ हुई बैठक में बिहार की विशेष परिस्थितियों का मुद्दा उठाया गया। बैठक में यह तर्क दिया गया कि कई जिलों में खरीद की रफ्तार तेज है, लेकिन मौसम और परिवहन संबंधी चुनौतियों के कारण कुछ किसान समय पर फसल नहीं बेच पाए हैं। केंद्र सरकार ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए समयसीमा बढ़ाने की अधिसूचना जारी कर दी।
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इस निर्णय के पीछे केवल समय विस्तार नहीं, बल्कि व्यापक कृषि-आर्थिक रणनीति भी दिखती है। अब तक राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में 6,400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भुगतान ने पारदर्शिता को मजबूत किया है और ग्रामीण बाजारों में नकदी प्रवाह बढ़ाया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह राशि गांवों में उपभोग, कृषि निवेश और स्थानीय व्यापार को नई गति दे रही है।
सरकार का लक्ष्य ‘समृद्ध किसान-सशक्त बिहार’ की अवधारणा को जमीन पर उतारना है। अभी तक कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 80 प्रतिशत हासिल किया जा चुका है और शेष 20 प्रतिशत को पूरा करने के लिए एक माह का अतिरिक्त समय निर्णायक साबित हो सकता है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह विस्तार खास महत्व रखता है, क्योंकि वे अक्सर परिवहन, भंडारण और नमी मानक जैसी प्रक्रियात्मक चुनौतियों से जूझते हैं।
समय विस्तार के साथ ही विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और पैक्स समितियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खरीद केंद्रों पर नमी मापन, तौल और रसीद जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित की जाए। किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए निगरानी तंत्र को भी सक्रिय किया गया है। सरकार चाहती है कि 31 मार्च 2026 तक शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर बिहार धान खरीद के मामले में एक उदाहरण पेश करे।






















