बिहार की राजनीति में एक बार फिर स्वास्थ्य नीति और वैक्सीनेशन कार्यक्रम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरजेडी नेता और विधायक Sudhakar Singh ने Bill & Melinda Gates Foundation और कई सरकारी अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि भारत में एचपीवी वैक्सीन (HPV Vaccine Controversy) कार्यक्रम के नाम पर स्कूली बच्चियों पर ट्रायल किए गए, जिनके दुष्प्रभाव सामने आए। सुधाकर सिंह ने कहा कि इस पूरे मामले की जानकारी उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar को भी दी है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उनके बयान के बाद राज्य की सियासत के साथ-साथ स्वास्थ्य नीति पर भी बहस तेज हो गई है।
क्या हैं आरोप?
सुधाकर सिंह का कहना है कि एचपीवी वैक्सीन कार्यक्रम के तहत भारत में बच्चियों को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव के नाम पर टीका दिया गया, लेकिन इसके दुष्प्रभावों पर पर्याप्त निगरानी नहीं रखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात और आंध्र प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के दौरान कुछ बच्चियों की मौत और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आई थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार में भी इसी प्रकार का वैक्सीनेशन कार्यक्रम चलाया गया और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उनके मुताबिक, मेडिकल रिसर्च और दान के नाम पर विदेशी फंडिंग से जुड़े कार्यक्रमों की पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं।
2013 की संसदीय रिपोर्ट का जिक्र
सुधाकर सिंह ने 30 अगस्त 2013 को प्रकाशित राज्यसभा की संसदीय स्थायी समिति की 72वीं रिपोर्ट का हवाला दिया। उस समय समिति में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई थी। रिपोर्ट में एचपीवी वैक्सीनेशन प्रोजेक्ट की प्रक्रिया, अनुमति प्रणाली और निगरानी तंत्र को लेकर सवाल उठाए गए थे। उस दौर में समिति से जुड़े Brijesh Pathak का भी उन्होंने उल्लेख किया। रिपोर्ट में यह टिप्पणी की गई थी कि पायलट प्रोजेक्ट के दौरान उचित अनुमति और निगरानी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसी संदर्भ को आधार बनाकर सुधाकर सिंह ने पूरे मामले की फिर से जांच की मांग की है।
2009 का PATH पायलट प्रोजेक्ट और विवाद
एचपीवी वैक्सीनेशन को लेकर विवाद नया नहीं है। वर्ष 2009 में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के तहत PATH नाम की संस्था ने सरकारी एजेंसियों के सहयोग से आंध्र प्रदेश और गुजरात में पायलट प्रोजेक्ट चलाया था। बाद में कुछ मौतों और प्रक्रियागत खामियों के आरोप सामने आए, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर जांच और बहस शुरू हुई थी। हालांकि, बाद की जांचों में यह भी कहा गया कि मौतों का सीधा संबंध वैक्सीन से सिद्ध नहीं हुआ, लेकिन प्रक्रियागत त्रुटियों को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं।






















