बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) का सत्र शुरू होते ही सियासी पारा चढ़ गया। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी दलों ने पोर्टिको में जोरदार प्रदर्शन किया और बढ़ते अपराध को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। पटना में हाल ही में एक कारोबारी की हत्या और दो भाइयों को गोली मारने की घटना ने विपक्ष को बड़ा मुद्दा दे दिया है। राजद और माले के विधायकों ने आरोप लगाया कि राजधानी पटना में अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं और सरकार कानून-व्यवस्था संभालने में नाकाम साबित हो रही है।
विपक्ष का कहना है कि तीन दिन पहले दो भाइयों की हत्या हुई थी और अब फिर दो भाइयों को गोली मार दी गई, जिसमें एक की मौत हो गई। इन घटनाओं ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी नेताओं ने सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि आम नागरिकों और कारोबारियों में भय का माहौल है।
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इस बीच दलितों को तीन डिसमिल जमीन देने के मुद्दे पर भी विपक्ष ने आवाज बुलंद की। पोर्टिको में प्रदर्शन के दौरान विधायकों ने मांग की कि सरकार दलित परिवारों को वादा की गई जमीन तत्काल उपलब्ध कराए। विपक्ष ने इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया।

वहीं राष्ट्रीय जनता दल के विधायक भाई वीरेंद्र ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री का दौरा राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने के लिए है और देश में सांप्रदायिक शक्तियों को मजबूती देने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना था कि किसी भी जिम्मेदार नेता को ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए जो समाज को बांटे।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के विधायक लखेंद्र पासवान ने अमित शाह के दौरे का बचाव करते हुए कहा कि गृह मंत्री सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए आए हैं। केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने की अटकलों पर उन्होंने कहा कि संविधान में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान है और इस तरह की चर्चाएं राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।






















