बिहार विधानसभा (Bihar Vidhan Sabha) के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को प्रश्नकाल में नगरपालिका अधिनियम की धारा 100 को लेकर ऐसा मुद्दा उठा, जिसने नगर निकायों की कार्यक्षमता और वित्तीय स्वायत्तता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने सरकार से सीधा सवाल किया कि जब किसी क्षेत्र को नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत घोषित किया जाता है, तो अधिसूचना के साथ ही वहां की सार्वजनिक परिसंपत्तियां संबंधित नगर इकाई को क्यों नहीं सौंपी जा रहीं। उन्होंने कहा कि पोखर, तालाब, बाजार और अन्य आय के स्रोतों के हस्तांतरण में देरी के कारण कई विकास योजनाएं कागजों में ही अटकी हुई हैं।
सदन में चर्चा के दौरान उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने यह प्रश्न मूल रूप से मंत्रिमंडल सचिवालय से जुड़े विषय के रूप में उठाया था, लेकिन इसे नगर विकास विभाग को स्थानांतरित कर दिया गया। उनका तर्क था कि 2007 के नगरपालिका अधिनियम की धारा 100 स्पष्ट रूप से कहती है कि अधिसूचना जारी होते ही परिसंपत्तियां नगर इकाई के अधीन आ जानी चाहिए। इसके बावजूद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं होने के कारण भूमि हस्तांतरण और राजस्व स्वीकृति की प्रक्रिया अधूरी है।
जीवेश मिश्रा ने सदन में यह भी सवाल उठाया कि जब नगर इकाइयों को बाजार और अन्य आय के स्रोत नहीं दिए जा रहे, तो होल्डिंग टैक्स वसूली का औचित्य क्या है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कई नई नगर इकाइयों की घोषणा आबादी वृद्धि के आधार पर की गई, लेकिन वित्तीय संसाधन हस्तांतरित न होने से ये निकाय संचालन और विकास दोनों मोर्चों पर कमजोर पड़ रहे हैं। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक देरी नहीं बल्कि स्थानीय निकायों के अधिकारों से जुड़ा विषय बताया।
विभागीय मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जवाब में कहा कि दाखिल-खारिज की प्रक्रिया बिहार दाखिल-खारिज अधिनियम 2011 के नियम 6 के तहत संचालित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले अंचल अधिकारी स्तर पर मामला देखा जाता है, फिर अपील डीसीएलआर न्यायालय में और उसके बाद उच्च स्तर पर पुनरीक्षण होता है। उन्होंने माना कि कुछ मामलों में आवेदन और अपीलें लंबित हैं, जिनकी समीक्षा जारी है। मंत्री ने यह भी कहा कि हाल के महीनों में अधिकारियों के स्थानांतरण और कर्मियों की हड़ताल जैसी परिस्थितियों से प्रक्रिया प्रभावित हुई, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो रही है।
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मंत्री ने यह स्वीकार किया कि कई जिलों में जिला परिषद, नगर परिषद और नगर निगम के बीच परिसंपत्तियों को लेकर दावेदारी और विवाद की स्थिति बनी हुई है। सरकार चरणबद्ध तरीके से समाधान की दिशा में काम कर रही है ताकि विकास योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। हालांकि, सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। एक टिप्पणी में यह भी कहा गया कि संबंधित विधायक स्वयं इस विभाग में मंत्री रह चुके हैं और प्रक्रिया से भली-भांति परिचित हैं।






















